प्रभुनाथ शुक्ल, भदोही
हमरे देश में सड़क अब सरकारी संपत्ति ना रह गईल, ई त पूरा का पूरा पारिवारिक धरोहर बन गइल बा। जवन सड़क सरकार करोड़ों लगा के बनवउले बा ओकर असली मालिक लोग खुदे मान लेले बा। फलां जी, ढिकां जी, उनकर खानदान आ साथे उनकर गोरु-गाय, भैंस, पड़ोसी के बैल तक। सड़क पर बाँधत बाड़े अगर आप गाड़ी ले के निकलीं त पहिले प्रणाम कर के निकलीं, काहे कि ई अब हाईवे ना, गोरु बाबा के राजपथ हौ।
भोर होते ही सड़क पर खेती-बारी के महोत्सव शुरू हो जाला। कहीं नाद-चंन्नी सजा के भैंस महारानी जुगाली करत बाड़ी, त कहीं गार्डर रख के लोहे-लत्ती के गोदाम खुल गइल बा। हल, हेंगा, बोरा, उपला, लकड़ी खेती गृहस्ती के हर सामान सड़क पर ऐसे पसारल जाला जैसे प्रदर्शनी लागल हो। पूछे वाला के जवाब तय बा अरे, साइड में ही त रखल बा।
पानी के मामला त औरे गंभीर बा। नल खुला रहे त पानी सड़क पर बहावल धर्म बन गइल बा। नाली में बहावे के झंझट कौन करे, सड़क पर बहता पानी देख के लोग कहेला देखा, गांव में गंगा खुद चल के आ गईल। एह गंगा में मवेशी नहाला, गाड़ी धोआई होखेला, बच्चा कागज के नाव चला के इंजीनियर बनत बा।
अब अगर कोई साहसी आदमी सलाह दे दे भइया, सड़क खाली रख दीं, त तुरंत क्रांति शुरू। लोग छाती ठोक के बोले हम दिल्ली तक शिकायत कर देंगे। दिल्ली सुने चाहे ना, लेकिन धमकी से सड़क जरूर और कस के कब्जा हो जाला। सबसे अद्भुत दृश्य तब बनेला जब सड़क पर ही संगम सज जाला। घर-आंगन छोड़ के सड़क पर स्नान, पूजा, हवन सब चालू। गाड़ी रुके त रुके, श्रद्धा में ब्रेक ना लागे। हॉर्न बजाई त जवाब मिले, अरे, धर्म में विघ्न मत डाल, दो मिनट रुक जा।
कुल मिला के सड़क अब रास्ता ना, रिश्ता बन गईल बा। हर आदमी अपन कब्जा जोड़ के बोल ई सड़क हमरी बपौती ह। सरकार बस नाम के मालिक बा, असली राज त गोरु बाबा, नाद-चंन्नी, बहती गंगा के ह। अब आप बताई ई सड़क पर गाड़ी चलार्इं कि पूजा-पाठ करके निकल जार्इं।
