प्रभुनाथ शुक्ल
भदोही
गांव के मौसम नेता लोग के बयान जइसन हो गइल बा, कब बदल जाई, केहू ना जानेला। बिहानहीं सूरज अइसन तमतमाइल निकलेला जइसे रातभर बिजली बिल देख के जागल होखे। नौ बजे ले धरती तवा बन जाले, दस बजे से हवा भी पंखा छोड़ के लू बनके घूमे लागेला। जे बाहर निकल गइल, उ घर लौटके एही पूछेला, हम बच गइनी कि भुजाइल आलू बन गइनी।
गांव में गर्मी के असली पहचान तब होला जब नल से पानी कम, आ सलाह जादे निकले लागेला।
कवनो कहेला प्याज जेब में रखे, लू ना लागी। दोसरा कहेला, सिर पर गमछा बांधे, भगवान बचइहें। तिसरका कहेला, घर से निकलबे मत करी । अब मजदूर आदमी अगर घर से ना निकली त रोटी चूल्हा पर खुद बन जाई का।
एह गर्मी में गांव के सबसे बड़ा वैज्ञानिक खोज हवे, आम के पना। कच्चा आम भुजाई, छीलाई, पीसाई, जीरा-नमक पड़ाई, फेर लोटा भर ठंडा पानी में घोलाई। एक गिलास भीतर गइल कि आदमी के आत्मा तक हरियर हो जाला। जे लोग शहर में हजार रुपइया के एनर्जी ड्रिंक पीके फोटो डालेले, ऊ अगर गांव के पना पी लेसु त मोबाइल छोड़ के गिलास पकड़ी। पना पीते ही बुजुर्ग लोग कहेला, अब जा बेटा, लू के बाप भी कुछ ना बिगाड़ी। एह बीच लगन के मौसम अलग तमाशा लेके आइल बा। सूरज माथा पर अंगीठी धइल बा, बाकि बरात समय पर निकले के चाहीं। दूल्हा घोड़ी पर कम, भाप के इंजन पर जादे लागेला। सेहरा के भीतर से पसीना धार बनके बहे लागेला। बैंड वाला आज मेरे यार की शादी है…बजाय, आ खुद पसीना पोछत रहे।
बराती लोग के असली नजर दुल्हिन पर ना, छेना पर टिकल रहे। जेहिजा मिठाई के टेबल दिखलस, ओहिजा लाइन अइसन लागल जइसे सरकारी नौकरी बंटात होखे। एक बराती प्लेट में चार गो रसगुल्ला, पांच गो छेना, दू गो गुलाबजामुन धरके कहे, बस थोड़ा चखतानी। दूसरा आदमी जेब में रुमाल ना, पन्नी लेके आइल बा, बच्चा लोग खातिर ले जातानी।
गर्मी, लू, लगन आ छेना ई चारों मिलके गांव के जीवन दर्शन समझावेला। चाहे तापमान ४५ डिग्री होखे, गांव वाला हंसी ना छोड़े। लू चले, बिजली जाए, पसीना बहे बाकि पना मिल जाव, बरात में छेना दिख जाव, त आदमी कहेला…मजा आ गईल।
!!समाप्त करी!!
