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भोजपुरिया व्यंग्य : बिहार में चुनावी मेला हौ…

प्रभुनाथ शुक्ल, भदोही

बिहार में चुनाव बा, आ सगरी नेता लोग के जुबान के बैटरी फुल चार्ज हो गइल बा। मंच पर माइक गरम बा, भीड़ में मूंछें तानल लोग खड़ा बा, आ नेता लोग कट्टा, पप्पू, टप्पू, अप्पू अउरी गप्पू, बंदर लेके एक-दूसरा पर गोला बरसावत बा। अब का करीं, ई बिहार हौ, इहाँ चुनाव में मुद्दा ना, मुहावरा अउरी जुबान जादे उड़ेला।
ई बिहार हौ राजा बिहार… इहवां दिल्ली और यूपी वाले भी बहक जाला। ऊ हौ बिहार के चुनावी हवा में बहै लगल लें। अब देखीं न ऊ दिल्ली वाले हमरा फकीर जी झोला उठाइए के उहाँ पहुंच गईले, विकास बदहाली अउरी बेकारी के बात करई के बजाय कट्टा, कनपटी अउरी बंदर के बात करई लगले। ई बिहार के असर हौ, जे भी उहाँ जाला ऊ उहाँ के रंग में ढल जाला। अब यूपी वाले बुलडोजर बाबा भी वहिजा के रंग में ढली गईलें। ऊ देखले कि दिल्ली वाले फकीर, हमारा से आगे निकल रहल हउवें त उहो तालठोंक के चुनावी मैदान में उतर गइले। पप्पू, टप्पू अउर अप्पू पर चढ़ गइलें। जब ई खबर अप्पू भईया के पता चलल त ऊ भी बिहारी अखड़ा में कहाँ पीछे रहई वाले, ऊ भी कूद गईलें अउरी अप्पू के बदला गप्पू अउरी चप्पू से दईके, ताल ठोंकई लगले। ओहर फकीर बाबा के एह बात से नाराज हमरे पप्पू भईया तालाब में कूद गईली अउरी मछरी पकड़ी के अपना गुस्सा शांत करई लगले।
बेचारे गांधी बाबा भी बिहार के चुनाव से परेशान हो गईल बाडे, ओनके नइखे बुझात बा कि ई चुनाव में हमारा अउर हमारा तीन बंदर के बेमतलब के परेशान कइल जात बा। अबहीं तक ले गांधीजी के तीन बंदर रहले, लेकिन अब तीन चुनावी बंदर पप्पू, टप्पू, अप्पू आ गईल बाड़े। अप्पू भईया भी दुई बंदर गप्पू अउरी चप्पू के पकड़ लियावल बाड़े अब कुल पांच गो बंदर हो गईल बाड़े। अब इंतजार हौ आगे केतना बंदर अउरी बिहार चुनाव में आवत हौ। बुलडोजर बाबा के सभा मे एगो नौजवान चिल्लाइल…बाबा जी! एगो बंदर और जोड़ दीजिए लप्पू, जे खाली माइक पर लप्प-लप्प बोलेला, काम कुछो ना करेला। मंच से बाबा जी मुस्करईले, बोलले… बेटा, तोरा में भी नेता बनला के टैलेंट हौ।
एगो नेताजी विरोधी पार्टी के उम्मीदवार के नचनिया बोल दिहले। अब भई, ई बिहार ह जवन गाना ना गावे, ऊ भी तड़के से लालीपॉप लागेलू गुनगुनावे लगले। जनता बोलई लगली नेता जी, अगर नचनिया से डर लगेला, त चुनावी मंच प मत चढ़ीं ऊ भी रियलिटी शो ह। लेकिन अपने पार्टी वाले ऊ लोगन के काहे नचनिया नइखे बोलत जे नाचत-नाचत नेता बन गईले। अपना बेरिया नजरिया बदल जाला।

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