मुख्यपृष्ठस्तंभभूटान की दो टूक...E२० पेट्रोल...! ना बाबा ना

भूटान की दो टूक…E२० पेट्रोल…! ना बाबा ना

संतोषी रावत

तो भैया, भूटान ने साफ कह दिया है,‘ना बाबा ना, हमें तुम्हारा ये E२० पेट्रोल नहीं चाहिए!’ सीधे शब्दों में समझें तो यह वो पेट्रोल है जिसमें २०ज्ञ् इथेनॉल मिलाया जाता है। भारत तो प्रदूषण और पैसे बचाने के चक्कर में इसमें जुटा है, लेकिन भूटान ने इस ‘कॉकटेल’ तेल से तौबा कर ली है। इसके पीछे की ‘साइंस’ और ‘लोकेशन’ दोनों में गहरी समझदारी छिपी है।
पानी खींचने की गंदी आदत
इथेनॉल को हवा की नमी से बड़ा प्यार है। यह हवा से पानी सोख लेता है। अब भूटान में कड़ाके की ठंड और नमी रहती है। अगर इस तेल को वहां के सामान्य टैंकों में ज्यादा दिन रखा गया, तो यह पानी सोखकर नीचे बैठ जाएगा और तेल ऊपर तैरने लगेगा।
स्टोरेज का तगड़ा लोचा
E२० पेट्रोल को रखने के लिए बिलकुल खास, वाटर-प्रूफ और चमचमाते हुए स्टोरेज टैंक चाहिए होते हैं। भूटान के पास अभी ऐसा इंप्रâास्ट्रक्चर नहीं है। अब इस मिलावटी तेल के चक्कर में वे अपने सारे पेट्रोल पंप और टैंक थोड़े ही न बदलेंगे!
पहाड़ी चढ़ाई और कम ताकत
इथेनॉल में नॉर्मल पेट्रोल जितनी ताकत यानी एनर्जी डेंसिटी नहीं होती। भूटान कोई समतल मैदान नहीं, ऊंचे-ऊंचे पहाड़ हैं। इस कम ताकत वाले तेल से गाड़ियां चढ़ाई पर हांफने लगेंगी और माइलेज भी बैठ जाएगा।
गाड़ियों के पेट में दर्द
यह तेल गाड़ियों के पाइप, मेटल पार्ट्स और रबर को गलाने लगता है, जिससे गाड़ियां समय से पहले बूढ़ी हो सकती हैं। जिसका सीधा-सीधा असर भूटानियों की जेब पर पड़ेगा और सरकार ऐसा कतई नहीं चाहती।
लब्बोलुआब यह है कि भूटान के पास न तो इस तेल को संभाल कर रखने के इंतजामात यानी स्टोरेज हैं, और न ही वे अपनी गाड़ियों की सेहत से खिलवाड़ चाहते हैं।
तो भाई, भूटान ने पूरी समझदारी से कह दिया ‘न रखने की जगह, न झेलने की ताकत; हमारा सादा पेट्रोल ही भला, आपकी ये
कॉकटेल आपको ही मुबारक!’

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