इसी साल सितंबर महीने में ओडिशा के खुर्दा जिले से एक दिल दहला देनेवाला मामला सामने आया था, जहां आठ महीने से लापता युवती निरुपमा परीडा उर्फ मीता की सड़ी-गली लाश एक गहरे खनन गड्ढे से बरामद हुई। इस मामले ने न सिर्फ हत्या की क्रूरता को दिखाया, बल्कि आरोपी की वो हैरान करनेवाली हरकतों को भी उजागर किया, जिसमें वो महीनों तक मृतका का मोबाइल फोन और एटीएम कार्ड इस्तेमाल करता रहा।
२४ जनवरी को हुई थी आखिरी बातचीत
मिली जानकारी के अनुसार, निरुपमा भुवनेश्वर के भरतपुर इलाके में एक घर में केयरटेकर के रूप में काम करती थी। २४ जनवरी को उसने अपने परिवार से आखिरी बार बात की थी और बताया था कि वो अपने पैतृक गांव रणपुर लौट रही है। इसके बाद से वो अचानक लापता हो गई। २७ जनवरी को परिवार वाले भरतपुर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई और निरंतर पुलिस व प्रशासन से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
८ महीने बाद मिली लाश
८ महीने बाद तापंग इलाके के एक गहरे खनन गड्ढे में पुलिस को एक पूरी तरह सड़ा हुआ शव मिला, जिसकी पहचान उसके पिता और भाई ने कपड़ों और सामान के आधार पर की। परिवार ने दावा किया कि निरुपमा की बेरहमी से हत्या की गई है।
क्यों हुई हत्या?
जांच के दौरान पुलिस को आखिरकार बड़ा सुराग मिला। ५ सितंबर को कई चरणों की पूछताछ के बाद देबाशीष बिसोई नामक आरोपी ने हत्या की बात स्वीकार कर ली। देबाशीष, जो निरुपमा का प्रेमी था, उस पर शक करता था कि उसका किसी और के साथ संबंध है। इसी शक की आग में उसने २४ जनवरी को उसे खुर्दा के एक सुनसान खनन क्षेत्र में ले जाकर गला दबाकर हत्या कर दी।
मृतका का मोबाइल और
एटीएम करता रहा इस्तेमाल
हत्या के बाद देबाशीष ने निरुपमा का मोबाइल फोन अपने पास रख लिया। पुलिस जांच में कई बार पाया गया कि मोबाइल ऑन किया गया था। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस से पुलिस को लगातार डिजिटल सबूत मिलते रहे। इतना ही नहीं, आरोपी मृतका के एटीएम कार्ड से पैसे भी निकालता रहा, जिससे पुलिस को उसके खिलाफ मजबूत प्रमाण मिले।
पुलिस ने किया गिरफ्तार
पुलिस कमिश्नर सुरेश देवदत्त सिंह के अनुसार, सभी डिजिटल और भौतिक सबूतों के आधार पर आरोपी व्ाâी पहचान कर गिरफ्तारी की गई। उसके पास से मृतका का बैग, पर्स, मोबाइल और एटीएम कार्ड भी बरामद किए गए। पुलिस का कहना था कि ये पूरी वारदात रिश्तों में अविश्वास और शक की वजह से हुई। ये मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि रिश्तों में अविश्वास किस हद तक खतरनाक रूप ले सकता है।
