मुख्यपृष्ठनए समाचारब्रैन स्कैन ने खोली ‘साइकोपैथ’ दिमाग की गुत्थी

ब्रैन स्कैन ने खोली ‘साइकोपैथ’ दिमाग की गुत्थी

-रोमांच, जोखिम और इनाम की चाह से जुड़ा हो सकता है मस्तिष्क का बड़ा हिस्सा

वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क के स्कैन में ऐसा अंतर देखा है, जो साइकोपैथिक प्रवृत्ति वाले लोगों और सामान्य लोगों के व्यवहार को समझने में मदद कर सकता है। साइंसडेली में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, सिंगापुर, यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया और वैâलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि साइकोपैथिक गुणों वाले लोगों के मस्तिष्क में स्ट्रायटम नामक हिस्सा औसतन लगभग १० प्रतिशत बड़ा हो सकता है। यह हिस्सा प्रेरणा, निर्णय, इनाम की अनुभूति और जोखिम लेने जैसी प्रवृत्तियों से जुड़ा माना जाता है।
साइकोपैथी को आमतौर पर ऐसे व्यक्तित्व-लक्षणों से जोड़ा जाता है, जिनमें आत्मकेंद्रितता, सहानुभूति की कमी, पछतावे का अभाव, आवेगपूर्ण व्यवहार और कई बार असामाजिक या आपराधिक प्रवृत्ति शामिल होती है। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे केवल ‘बुराई’ या ‘चरित्र दोष’ मानकर समझना अधूरा होगा, क्योंकि इसके पीछे मस्तिष्क की बनावट और कार्यप्रणाली की भूमिका भी हो सकती है।
शोध में एमआरआई स्वैâन के आधार पर पाया गया कि जिन लोगों में साइकोपैथिक प्रवृत्तियां अधिक थीं, उनके स्ट्रायटम का आकार उन लोगों की तुलना में बड़ा था जिनमें ऐसी प्रवृत्तियां कम या नहीं थीं। स्ट्रायटम मस्तिष्क का वह हिस्सा है जो किसी कार्य से मिलने वाले ‘इनाम’ या सुखद परिणाम की अपेक्षा को प्रभावित करता है। इसी कारण वैज्ञानिकों का अनुमान है कि साइकोपैथिक प्रवृत्ति वाले लोग तुरंत मिलने वाले लाभ, रोमांच या उत्तेजना को ज्यादा महत्व दे सकते हैं। हालांकि, इस खोज का मतलब यह नहीं है कि मस्तिष्क का स्वैâन देखकर किसी व्यक्ति को सीधे अपराधी या साइकोपैथ घोषित कर दिया जाए। वैज्ञानिक निष्कर्ष समूह-स्तर पर देखे गए औसत अंतर बताते हैं, व्यक्तिगत चरित्र प्रमाणपत्र नहीं। मस्तिष्क की बनावट, परवरिश, सामाजिक वातावरण, आघात, शिक्षा और जीवन-अनुभव ये सभी मिलकर व्यवहार को आकार देते हैं। पहले के अध्ययनों में भी साइकोपैथी से जुड़ी मस्तिष्कीय भिन्नताएं सामने आई हैं। २०११ के एक अध्ययन में पाया गया था कि साइकोपैथी से जुड़े लोगों में वेंट्रोमीडियल प्रीप्रâंटल कॉर्टेक्स और अमिग्डाला के बीच संपर्क कमजोर हो सकता है। ये क्षेत्र अपराधबोध, सहानुभूति, भय और भावनात्मक निर्णयों से जुड़े माने जाते हैं। इस अध्ययन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि साइकोपैथी को केवल नैतिक या सामाजिक समस्या के रूप में नहीं, बल्कि न्यूरोबायोलॉजिकल दृष्टि से भी समझने की जरूरत है। इससे भविष्य में जोखिमपूर्ण व्यवहार, हिंसक प्रवृत्ति या असामाजिक व्यक्तित्व को समय रहते पहचानने और बेहतर मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप तैयार करने में मदद मिल सकती है।
यह खोज डराने वाली जरूर लगती है, लेकिन इसका उद्देश्य किसी को कलंकित करना नहीं, बल्कि यह समझना है कि कुछ लोग जोखिम, रोमांच और तत्काल लाभ की ओर असामान्य रूप से क्यों आकर्षित होते हैं। विज्ञान अब अपराध और व्यक्तित्व के पीछे छिपे दिमागी तंत्र को अधिक गहराई से पढ़ने की कोशिश कर रहा है।

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