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वाह रे बिहार! …सत्ता के लिए कुछ भी करेगा, टूटते पुलों के लिए कुछ भी नहीं!

संतोषी रावत
पटना के गलियारों में जब सत्ता की कुर्सी के लिए पासे फेंके जा रहे थे, तब गंगा की लहरों पर एक और तबाही शक्ल अख्तियार कर रही थी। बिहार में राजनीतिक उठा-पटक इस कदर हावी थी कि हुक्मरान यह भूल ही गए कि सूबे में ऐसे कई पुल हैं जो जर्जर होकर कभी भी जमींदोज हो सकते हैं। हैरान करने वाली बात तो यह थी कि देश के शीर्ष आईआईटी संस्थानों ने इन पुलों की जांच कर एक चेतावनी भरी रिपोर्ट सौंपी थी, लेकिन फाइलें सत्ता के जोड़-तोड़ वाले कमरों में धूल फांकती रहीं। नतीजतन, प्रशासनिक लापरवाही की गाज भागलपुर में गंगा नदी पर बने २५ साल पुराने ऐतिहासिक विक्रमशिला सेतु पर गिरी।
मई ३-४ २०२६
रात का सन्नाटा गहरा था, जब भारी वाहनों का रेला उस विशालकाय पुल से गुजर रहा था। तभी एक ट्रक ड्राइवर की नजर पुल के खंभों और सड़क पर आई भयानक दरारों पर पड़ी। उसे खतरे का अहसास हुआ और उसने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना दी। प्रशासन ने आनन-फानन में मुस्तैदी दिखाई और यातायात को रोक दिया। कुछ ही घंटों बाद, एक जोरदार गड़गड़ाहट के साथ विक्रमशिला सेतु का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर गंगा की लहरों में समा गया। उस अनजान ड्राइवर की सतर्कता ने सैकड़ों बेगुनाह जिंदगियों को मौत के मुंह में जाने से बचा लिया।
हादसा होते ही सरकार की नींद टूटी, लेकिन सुधार के लिए नहीं, बल्कि हमेशा की तरह लीपापोती के लिए। अगली ही सुबह एक प्रेस कॉन्प्रâेंस बुलाई गई और एक छोटे अधिकारी को बलि का बकरा बनाकर बर्खास्त कर दिया गया। सरकार ने इस एकतरफा कार्रवाई से अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
यह कोई पहला वाकया नहीं था। बिहार में लगातार गिरते पुलों को लेकर मीडिया से लेकर आम जनता के बीच तीखी चर्चाएं होती हैं, जनाक्रोश भड़कता है, लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। जब तक राजनेता कुर्सी बचाने और गिराने के खेल में व्यस्त रहेंगे, तब तक विकास के नाम पर बने यह कंक्रीट के ढांचे इसी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते रहेंगे और जनता अपनी नियति पर आंसू बहाती रहेगी।

आईआईटी की चेतावनी भी नहीं जगा सकी सरकार को
देश के शीर्ष आईआईटी संस्थानों ने बिहार के कई जर्जर पुलों को लेकर पहले ही चेतावनी भरी रिपोर्ट सौंपी थी। बावजूद इसके, प्रशासन और सरकार ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया। नतीजा यह हुआ कि विक्रमशिला सेतु हादसे ने व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया।

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