हरिगोविंद विश्वकर्मा
भारत की नई खोज चमचासन के बारे में अब आप जान ही गए हैं। पिछले कुछ वर्षों से देश में चमचासन बड़ी तेजी से लोकप्रिय भी हुआ है। अब तो यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जाना जाने लगा है। ऐसे में स्वाभाविक है कि लोगों के अंदर चमचासन करने की जिज्ञासा पैदा हो गई है। हजारों युवाओं ने उसे करने में दिलचस्पी दिखाई है। सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रशिक्षण पुस्तिका जारी नहीं की है इसलिए जनहित में यह विधि प्रकाशित की जा रही है।
आसन की खूबियां
इससे इच्छुक लोग चमचासन करके उसकी खूबियों से लाभान्वित हो सकेंगे। राजनीति को करियर बनानेवालों के लिए इसे सीखना अतिरिक्त योग्यता मानी जाएगी। चमचासन तीन चरण में किया जाता है। इसके पहले दो चरण खड़े होकर किए जाते हैं, जबकि तीसरा चरण बैठकर।
सबसे पहले चरण में सीधे खड़े हो जाएं। नजर सामने हो। आंखों में मक्कारी का भाव और चेहरे पर कुटिलता हो। फिर चेहरे की नसों को आहिस्ता से ढीला करते हुए कुटिलता को भोलेपन में बदलें। कुछ सेकंड उसी मुद्रा में रहें। फिर भोलेपन को दीनता में परिवर्तित करें। अंत में चेहरे पर खीस निपोरने जैसी मुद्रा दिखनी चाहिए। इसका भी खूब अभ्यास करें। इतना अभ्यास करें कि खीस निपोरने में माहिर हो जाएं। खीस निपोरने में माहिर लोग ही सफल चमचा बनते हैं। खीस निपोरना एक तरह का समर्पण है। चेहरे पर खीस निपोरने जैसी मुद्रा होनी ही चाहिए। यही चमचासन की पहली परीक्षा है।
दूसरे चरण में अपनी आंखों में मौजूद मक्कारी की मुद्रा को धीरे से मासूमियत में बदलें। कुछ सेकंड उसी मुद्रा में रहें। बाद में मासूमियत को समर्पण की मुद्रा में तब्दील करें। अंत में समर्पण को चाटुकारिता में परिवर्तित कर दें। तदुपरांत नजर धीरे-धीरे नीचे लाएं। पांवों को सीधा रखते हुए आगे की ओर झुकें। जितना झुक सकें, उतना झुकें। कुछ सेकंड उसी मुद्रा में रहें। अब धीरे-धीरे पहले वाली मुद्रा में आ जाएं। इसका अभ्यास कम से कम दस बार करें। इससे आपकी रीढ़ अधिक लचीली होगी। लचीली रीढ़ से झुकने में असुविधा नहीं होती है। तब आप खुद को रीढ़विहीन यानी स्पाइनलेस महसूस करेंगे। जब भी चाहेंगे या जब जरूरत पड़ेगी, केंचुए की तरह विनीत हो सकेंगे। इस अभ्यास का एक और लाभ है। आपके अंदर स्वाभिमान और आत्मसम्मान के कीड़े हमेशा के लिए मर जाएंगे। ये दोनों चमचासन करने में बड़ी बाधाएं होती हैं। इनके खत्म होते ही दूसरा चरण पूरा हो जाता है।
तीसरे चरण में टांगों को सीधा रखकर धीरे-धीरे झुकें। फिर घुटने के बल बैठ जाएं। बैठने के बाद चेहरा आगे लाएं और नाक से फर्श से स्पर्श करें। उसी मुद्रा में दस सेकंड रहें। फर्श पर नाक स्पर्श करने के बाद नाक फर्श पर रगड़ना शुरू करें। यह क्रिया तब तक करें, जब तक नाक में दर्द न होने लगे। आरंभ में नाक रगड़ने में दर्द के साथ असुविधा भी होती है। अगर ऐसा महसूस हो तो लंबी-लंबी सांस लें। थोड़ी देर बाद उस क्रिया को पुन: दोहराएं। दरअसल, योगाचार्यों का मानना है कि नाक की त्वचा संवेदनशील होती है। आरंभ में नाक रगड़ने में असुविधा होती है। लेकिन लगातार अभ्यास से आप नाक रगड़ने में सिद्धहस्त हो सकते हैं। जैसे ही नाक की त्वचा मोटी होगी, यानी नाक रगड़ने में सिद्धहस्त होंगे, वैसे ही आपके अंदर की संवेदना मरती जाएगी। संवेदना के मरते ही चमचासन सीखने की प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है। तीनों चरण पूरा करने के बाद अब आप चमचासन में प्रवीण हो जाएंगे।
उपब्लिधयां
चमचासन आपके लिए तरक्की के दरवाजे खोल देगा। चमचासन सीखने के बाद आप दूसरों के सामने बिना संकोच के खीस निपोर सकते हैं। किसी की भी प्रशंसा और चाटुकारिता कर सकते हैं। उसके तलवे चाट सकते हैं। चूंकि आपके अंदर स्वाभिमान और आत्मसम्मान पहले ही मर चुके होते हैं तो आपको तलवे चाटने में बिल्कुल भी संकोच नहीं होगा। बल्कि आप तलवे चाटकर खुश होंगे। यही वजह है कि चमचासन सीखने वाला हर व्यक्ति आशातीत सफलता हासिल करता है। यह गुण राजनीति में शिखर पर ले जाता है। राजनीति ही नहीं, यह गुण आपको हर क्षेत्र में शीर्ष पर ले जाता है। आज के दौर में चमचासन सफलता की गारंटी है। चमचासन सीखने के बाद बिना परिश्रम के काम, नौकरी, इनक्रीमेंट और प्रमोशन मिल सकता है। यानी जहां योग्यता हार जाती है, वहां चमचासन जीत जाता है।
