मुख्यपृष्ठसमाज-संस्कृतिआषाढ़ी एकादशी पर गूंजे विठ्ठल नाम के जयघोष

आषाढ़ी एकादशी पर गूंजे विठ्ठल नाम के जयघोष

-वी.पी.एम्स में भक्ति, संस्कार और मातृभाषाओं का अद्भुत संगम

सामना संवाददाता / मुंबई

आषाढ़ी एकादशी के पावन पर्व पर वी.पी.एम्स बी.आर. टोल इंग्लिश हाई स्कूल, मुलुंड (पूर्व) में आयोजित धार्मिक, सांस्कृतिक एवं भारतीय भाषा उत्सव ने विद्यालय परिसर को भक्तिमय वातावरण में रंग दिया। विठ्ठल नाम के जयघोष, संतों के अभंग, पारंपरिक नृत्य और भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत प्रस्तुतियों ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
विठ्ठल माऊली की पालकी से हुआ शुभारंभ
समारोह का शुभारंभ श्री विठ्ठल माऊली की भव्य पालकी के आगमन और विद्यालय की प्रधानाचार्या अजीता नायर द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। सामूहिक प्रार्थना के बाद विद्यार्थियों ने संत परंपरा पर आधारित मराठी अभंगों का सुमधुर गायन तथा मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर वारकरी परंपरा की जीवंत झलक प्रस्तुत की।
नाटिका, भारुड और पथनाट्य ने दिया संस्कारों का संदेश
कार्यक्रम के दौरान भक्त पुंडलिक एवं भगवान विठ्ठल के जीवन पर आधारित लघु नाटिका, भारुड, संत तुकाराम महाराज के संदेशों पर प्रेरक प्रस्तुति, पथनाट्य तथा भगवान विठ्ठल को समर्पित भावपूर्ण पत्र वाचन ने सभी को भावविभोर कर दिया। पथनाट्य के माध्यम से विद्यार्थियों ने पारिवारिक मूल्यों, पीढ़ियों के बीच संवाद, भारतीय संस्कृति के संरक्षण तथा मातृभाषाओं के महत्व का प्रभावशाली संदेश दिया।
वारकरी संप्रदाय के अभंगों और श्री विठ्ठल के जयघोष से पूरा विद्यालय परिसर भक्तिरस में सराबोर हो गया। रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा में विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को जीवंत बना दिया। आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियों के साथ कार्यक्रम का भव्य समापन हुआ।
संतों की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का आह्वान
इस अवसर पर प्रधानाचार्या अजीता नायर ने विद्यार्थियों को संतों की शिक्षाओं को जीवन में आत्मसात करने, भारतीय भाषाओं के संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत के सम्मान तथा नैतिक मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और मातृभाषाओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।
संस्कार, संस्कृति और भाषा संरक्षण का संदेश
अजीता नायर ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में आध्यात्मिक चेतना, भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव तथा भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना था। शिक्षा के साथ संस्कारों के समन्वय का यह आयोजन सभी के लिए प्रेरणादायी और अविस्मरणीय बन गया।

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