एजेंसी / मुंबई
ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भारी नाराजगी है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सलाहकार बल मलकीत सिंह ने कहा कि सरकार धीरे-धीरे दाम बढ़ाने के बजाय एक बार में कीमतें बढ़ाए, ताकि ट्रांसपोर्टर्स को बार-बार झटका न लगे। १५ मई से अब तक डीजल करीब ८ रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है, जिसमें आज की लगभग २.७१ प्रति लीटर की बढ़ोतरी भी शामिल है। बढ़ती लागत के कारण ट्रांसपोर्ट कारोबार पर असर पड़ा है।
अब ट्रांसपोर्टरों ने माल ढुलाई दरों में ४ फीसदी की बढ़ोतरी की घोषणा की है ताकि अतिरिक्त बोझ ग्राहकों पर डाला जा सके। डीजल की बढ़ती कीमतों की भरपाई के लिए, परिवहनकर्ताओं ने र्इंधन समायोजन कारक नामक एक नई गणना विधि शुरू की है, जो डीजल की बढ़ती कीमतों के प्रभाव को नियंत्रित करेगी। परिचालन लागत का ६५ फीसदी हिस्सा डीजल की बढ़ती कीमतों का ही होता है। उन्होंने ग्राहकों से इस नई व्यवस्था को स्वीकार करने और अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करने की अपील की है, ताकि परिवहनकर्ता अपने ऋणों का भुगतान करने में चूक न करें।
किचन का भी बिगड़ेगा बजट
आम जनता के लिए महंगाई का एक और बड़ा झटका लेकर आई। तेल कंपनियों द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी। अब इसका असर केवल वाहनों के ईंधन टैंक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर लोगों की रसोई से लेकर उनके काम-धंधे पर पड़ने वाला है। वाहन ईंधन मूल्य वृद्धि के कारण आनेवाले कुछ ही दिनों में ट्रांसपोर्ट से लेकर किचन तक का खर्च बढ़ जाएगा, जिससे आम आदमी का मासिक बजट करीब १० फीसदी तक बिगड़ना तय है।
छोटे उद्योग और कारोबार पर भी असर
जिले के लघु उद्योगों, जनरेटर पर चलने वाली दुकानों और छोटे कारखानों का परिचालन खर्च बढ़ जाएगा। इसके अलावा ऑनलाइन डिलिवरी जैसे ई-कॉमर्स और फूड डिलिवरी के बिजनेस पर भी इसका बुरा असर पड़ेगा। डिलिवरी बॉयज का कमीशन और डिलीवरी चार्ज भी बढ़ेगा। उसके कारण उपभोक्ताओं को ऑनलाइन सामान मंगाना भी भारी पड़ेगा।
