-इनाम वर्ग-3 की जमीन पर हेलिपैड, वीआईपी पार्किंग और लाउंज की तैयारी; कोलांबिका देवी ट्रस्ट की आपत्ति, मामला हाई कोर्ट में लंबित
सुनील ओसवाल / मुंबई / नासिक
सिंहस्थ कुंभ मेले के ध्वजारोहण समारोह से पहले त्र्यंबकेश्वर में राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे के लिए हेलिपैड, वीआईपी पार्किंग और लाउंज बनाने की तैयारी विवादों में घिर गई है। संबंधित जमीनों के मालिकाना हक पर श्री कोलांबिका देवी एवं गंगाद्वार ट्रस्ट ने सवाल उठाते हुए किराये और मुआवजे पर अपना दावा किया है। जमीन से जुड़ा मामला मुंबई हाई कोर्ट में लंबित है।
31 अक्टूबर को राष्ट्रपति के हाथों सिंहस्थ कुंभ मेले के ध्वजारोहण का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसके लिए प्रशासन त्र्यंबकेश्वर में आवश्यक सुविधाएं विकसित कर रहा है। इसी बीच गट क्रमांक 300, 309, 321, 322/2, 324, 325, 326, 327, 328 और 358 की जमीनों को लेकर विवाद सामने आया है।
ट्रस्ट का आरोप है कि ये जमीनें देवस्थान की इनाम वर्ग-3 की संपत्तियां हैं और इनमें कथित रूप से अवैध काश्तकारी प्रविष्टियां दर्ज कर दूसरे लोगों के नाम शामिल किए गए। ट्रस्ट के अनुसार, तत्कालीन अपर जिलाधिकारी की रिपोर्ट और तत्कालीन राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटील के आदेश के आधार पर संबंधित प्रविष्टियां रद्द कर सातबारा रिकॉर्ड में श्री कोलांबिका देवी का नाम दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, स्वामित्व विवाद का अंतिम फैसला न्यायालय में होना बाकी है।
ट्रस्ट ने सिंहस्थ कुंभ मेला आयुक्त शेखर सिंह को पत्र देकर मांग की है कि विवादित जमीन का किराया किसी बिल्डर या अन्य दावेदार को देने के बजाय ट्रस्ट को दिया जाए अथवा अंतिम निर्णय होने तक अदालत में जमा कराया जाए। ट्रस्ट के खजिनदार नचिकेत महाजन के अनुसार, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ट्रस्ट कुंभ मेले हेतु जमीन निःशुल्क उपलब्ध कराने को भी तैयार है।
वहीं, नासिक के जिलाधिकारी आयुष प्रसाद ने कहा है कि हेलिपोर्ट के लिए प्रस्तावित जमीन कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रशासन के कब्जे में ली गई है। आपत्तियों से संबंधित प्रक्रिया प्रांताधिकारी स्तर पर पूरी की गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जमीन का विवाद न्यायालय में लंबित होने के कारण संबंधित मुआवजे की राशि अदालत में जमा की जाएगी और न्यायिक फैसले के अनुसार उसका वितरण होगा।
राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे से पहले जमीन के स्वामित्व, राजस्व रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं और मुआवजे को लेकर विवाद ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि कानूनी विवाद के बीच हेलिपैड और अन्य सुविधाओं का काम निर्धारित समय पर पूरा हो पाता है या नहीं।
