मुख्यपृष्ठस्तंभकोर्ट-रूम : एड. कनई बिस्वास : लोकसेवक पर हमला अपराध है

कोर्ट-रूम : एड. कनई बिस्वास : लोकसेवक पर हमला अपराध है

-धारा १९३, १९४ और १९५

भारतीय न्याय संहिता, २०२३ केवल दंगा करनेवालों को ही जिम्मेदार नहीं ‘ठहराती, बल्कि कुछ परिस्थितियों में उस स्थान के स्वामी या कब्जाधारी की भी जिम्मेदारी तय करती है, जहां अवैध जमाव या दंगा होता है। साथ ही, सार्वजनिक स्थान पर होनेवाले झगड़े तथा दंगा नियंत्रित करने वाले लोक सेवकों पर हमला या उनके कार्य में बाधा डालना भी गंभीर अपराध है। धारा १९३, १९४ और १९५ इन्हीं विषयों से संबंधित हैं।
केस स्टडी-१: ‘अवैध जमाव या दंगा होने वाले स्थान के स्वामी या कब्जाधारी की जिम्मेदारी’ (धारा १९३)
एक गोदाम के मालिक को पहले से जानकारी थी कि उसकी संपत्ति पर बड़ी संख्या में लोग हथियारों के साथ अवैध रूप से एकत्र होकर हिंसक गतिविधि की योजना बना रहे हैं। इसके बावजूद उसने प्रशासन को कोई सूचना नहीं दी और न ही उन्हें रोकने का प्रयास किया। बाद में वहीं दंगा हो गया।
अदालत क्या देखेगी?
पैâसला- यदि यह सिद्ध हो जाता है कि स्वामी या कब्जाधारी ने अपनी कानूनी जिम्मेदारी का पालन नहीं किया, तो उसके विरुद्ध धारा १९३ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १९३ का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी संपत्ति का स्वामी या प्रबंधक अपनी भूमि का उपयोग कानून-विरुद्ध गतिविधियों के लिए होने पर चुप न रहे। आवश्यक सूचना देना और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करना उसकी जिम्मेदारी है।
केस स्टडी – २: ‘झगड़ा’ (धारा १९४)
बाजार में दो व्यक्तियों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों ने सार्वजनिक स्थान पर एक-दूसरे पर हमला करना शुरू कर दिया। उनके झगड़े से आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई और सार्वजनिक शांति भंग हो गई।
पैâसला- यदि यह सिद्ध हो जाता है कि सार्वजनिक स्थान पर हुए झगड़े से शांति भंग हुई, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध धारा १९४ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १९४ के अनुसार, सार्वजनिक स्थान पर दो या अधिक व्यक्तियों द्वारा किया गया ऐसा झगड़ा, जिससे लोगों की शांति भंग हो, ‘झगड़ा’ कहलाता है। इसके लिए किसी अवैध जमाव का होना आवश्यक नहीं है।
केस स्टडी- ३: ‘दंगा नियंत्रित करते समय लोक सेवक पर हमला या बाधा पहुंचाना’ (धारा १९५)
एक हिंसक प्रदर्शन के दौरान पुलिस और अन्य लोक सेवक भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने उन पर पथराव किया, धक्का-मुक्की की और सरकारी कार्य में बाधा डाली।
पैâसला- यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने दंगा नियंत्रित कर रहे लोक सेवक पर हमला किया या उसके कार्य में बाधा पहुंचाई, तो उसके विरुद्ध धारा १९५ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १९५ लोक सेवकों को उनके वैधानिक कर्तव्यों के दौरान सुरक्षा प्रदान करती है।
(अगले अंक में: धारा १९६, १९७ और १९८- ‘धर्म, जाति, भाषा, जन्मस्थान आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य पैâलाना, राष्ट्रीय एकता के प्रतिकूल कथन करना तथा लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने की मंशा से कानून की अवज्ञा करना’ को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझेंगे।)

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