मुख्यपृष्ठस्तंभकोर्ट-रूम : चुनाव में रिश्वत अपराध है

कोर्ट-रूम : चुनाव में रिश्वत अपराध है

 -अभ्यर्थी और निर्वाचन अधिकार की परिभाषा, रिश्वत तथा चुनाव में अनुचित प्रभाव
-धारा १६९, १७० और १७१
-भाग:५७

एड. कनई बिस्वास

भारत का लोकतंत्र स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनावों पर आधारित है। मतदाता अपनी इच्छा से प्रतिनिधि चुन सके, किसी प्रकार के लालच, दबाव या भय का शिकार न हो और चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता बनी रहे, इसके लिए भारतीय न्याय संहिता, २०२३ में विशेष प्रावधान किए गए हैं। धारा १६९ चुनाव संबंधी कुछ महत्वपूर्ण शब्दों की परिभाषा देती है, जबकि धारा १७० और १७१ चुनाव में रिश्वत तथा अनुचित प्रभाव जैसे अपराधों को दंडनीय बनाती हैं।
केस स्टडी – १: ‘अभ्यर्थी और निर्वाचन अधिकार की परिभाषा’ (धारा १६९)
नगर पंचायत चुनाव में एक व्यक्ति ने अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया था। मतदान से पहले उसके विरुद्ध चुनाव संबंधी अपराध की शिकायत दर्ज हुई। जांच के दौरान यह प्रश्न उठा कि क्या वह कानून की दृष्टि में ‘अभ्यर्थी’ है और मतदाताओं के ‘निर्वाचन अधिकार’ में कौन-कौन से अधिकार शामिल हैं।
अदालत क्या देखेगी?
क्या संबंधित व्यक्ति विधि के अनुसार अभ्यर्थी था?
क्या मामला निर्वाचन अधिकारों से संबंधित था?
क्या विवाद का समाधान धारा १६९ में दी गई परिभाषाओं के आधार पर किया जा सकता है?
पैâसला- यदि यह सिद्ध हो जाता है कि संबंधित व्यक्ति धारा १६९ के अनुसार अभ्यर्थी है और विवाद निर्वाचन अधिकार से जुड़ा है तो आगे की कार्यवाही इन्हीं कानूनी परिभाषाओं के आधार पर होगी। समझें: धारा १६९ स्वयं किसी अपराध का दंड निर्धारित नहीं करती। इसका उद्देश्य चुनाव संबंधी अपराधों में प्रयुक्त ‘अभ्यर्थी’ और ‘निर्वाचन अधिकार’ जैसे शब्दों का कानूनी अर्थ स्पष्ट करना है।
केस स्टडी- २: ‘रिश्वत’ (धारा १७०)
एक विधानसभा चुनाव के दौरान एक प्रत्याशी के समर्थकों ने मतदाताओं को नकद राशि और महंगे उपहार देने शुरू किए। बदले में उनसे उसी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने का वादा लिया गया। शिकायत मिलने पर चुनाव अधिकारियों और पुलिस ने जांच शुरू की।
अदालत क्या देखेगी?
क्या मतदाताओं को मतदान प्रभावित करने के उद्देश्य से धन, उपहार या अन्य लाभ दिया गया?
क्या रिश्वत का उद्देश्य किसी विशेष उम्मीदवार के पक्ष या विपक्ष में मतदान करवाना था?
क्या आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं?
पैâसला- यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने चुनाव को प्रभावित करने के उद्देश्य से रिश्वत दी या दिलवाई, तो उसके विरुद्ध धारा १७० के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १७० का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता किसी लालच या आर्थिक प्रलोभन के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी स्वतंत्र इच्छा से मतदान करें।
केस स्टडी- ३: ‘चुनाव में अनुचित प्रभाव’ (धारा १७१)
एक प्रभावशाली व्यक्ति ने गांव के मतदाताओं को धमकी दी कि यदि उन्होंने किसी विशेष उम्मीदवार को वोट नहीं दिया तो उन्हें सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर दिया जाएगा और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। शिकायत के बाद जांच शुरू हुई।
अदालत क्या देखेगी?
क्या मतदाताओं पर भय, धमकी या दबाव डालकर मतदान प्रभावित करने का प्रयास किया गया?
क्या आरोपी का उद्देश्य मतदाता की स्वतंत्र पसंद को प्रभावित करना था?
क्या इस संबंध में विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध हैं?
पैâसला- यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने मतदाताओं पर अनुचित प्रभाव डालकर चुनाव परिणाम को प्रभावित करने का प्रयास किया, तो उसके विरुद्ध धारा १७१ के तहत कार्रवाई की जाएगी।
समझें: धारा १७१ यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक मतदाता बिना किसी भय, दबाव या अनुचित प्रभाव के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके। लोकतंत्र में स्वतंत्र मतदान प्रत्येक नागरिक का मूल अधिकार है। भारतीय न्याय संहिता यह स्पष्ट करती है कि चुनाव केवल मतदान की प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा हैं। मतदाताओं को रिश्वत देकर प्रभावित करना, उन पर दबाव डालना या उनकी स्वतंत्र पसंद में हस्तक्षेप करना लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है। इसलिए कानून चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ऐसे कृत्यों को दंडनीय अपराध घोषित करता है।
(अगले अंक में: धारा १७२, १७३ और १७४- चुनाव में किसी अन्य व्यक्ति का रूप धारण कर मतदान करना, रिश्वत के लिए दंड तथा चुनाव में अनुचित प्रभाव और प्रतिरूपण के लिए दंड को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझेंगे।)

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