भाग:७०
–एड. कनई बिस्वास
भारतीय न्याय संहिता, २०२३ यह सुनिश्चित करती है कि न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया में प्रत्येक व्यक्ति कानून के अनुसार सहयोग करे। यदि किसी व्यक्ति को लोक सेवक द्वारा विधि के अनुसार, उपस्थित होने का आदेश दिया जाता है, न्यायालय की उद्घोषणा के बाद भी वह उपस्थित नहीं होता या वह कानूनन प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेज अथवा इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख जानबूझकर प्रस्तुत नहीं करता, तो यह दंडनीय अपराध है। धारा २०८, २०९ और २१० इन्हीं कर्तव्यों और उनके उल्लंघन से संबंधित हैं।
केस स्टडी – १: ‘लोक सेवक के आदेश का पालन करते हुए उपस्थित न होना’ (धारा २०८)
एक राजस्व अधिकारी ने भूमि विवाद की जांच के लिए संबंधित पक्ष को निर्धारित तिथि पर उपस्थित होने का वैध आदेश जारी किया। आदेश मिलने के बावजूद वह व्यक्ति बिना किसी उचित कारण के लगातार अनुपस्थित रहा, जिससे जांच प्रभावित हुई।
फैसला – यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने जानबूझकर लोक सेवक के वैध आदेश की अवज्ञा करते हुए उपस्थित होने से इनकार किया, तो उसके विरुद्ध धारा २०८ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा २०८ का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कानून के अनुसार जारी किए गए आदेशों का पालन किया जाए। बिना उचित कारण के अनुपस्थित रहना न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करता है।
केस स्टडी – २: ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, २०२३ की धारा ८४ के अधीन जारी उद्घोषणा के बावजूद उपस्थित न होना’ (धारा २०९)
एक आरोपी लंबे समय तक फरार रहा। इसके बाद न्यायालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, २०२३ की धारा ८४ के अंतर्गत उद्घोषणा जारी कर उसे निर्धारित तिथि तक उपस्थित होने का निर्देश दिया। इसके बावजूद वह न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ।
फैसला – यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी उद्घोषणा के बावजूद जानबूझकर न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ, तो उसके विरुद्ध धारा २०९ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा २०९ उन व्यक्तियों पर लागू होती है, जो न्यायालय द्वारा उद्घोषित किए जाने के बाद भी जानबूझकर उपस्थित नहीं होते। इसका उद्देश्य न्याय से बचने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है।
केस स्टडी– ३: ‘दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख प्रस्तुत न करना’ (धारा २१०)
एक कंपनी के प्रबंधक को जांच अधिकारी ने कंपनी के लेखा-जोखा और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का वैध आदेश दिया। उसके पास सभी अभिलेख उपलब्ध होने के बावजूद उसने उन्हें जानबूझकर छिपा लिया और जांच एजेंसी को उपलब्ध नहीं कराया।
क्या इससे जांच या सरकारी कार्य प्रभावित हुआ?
फैसला – यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने विधिक दायित्व होने के बावजूद दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए, तो उसके विरुद्ध धारा २१० के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा २१० का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच, न्यायिक कार्यवाही या प्रशासनिक प्रक्रिया के लिए आवश्यक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख समय पर उपलब्ध कराए जाएं। जानबूझकर उन्हें छिपाना या प्रस्तुत न करना दंडनीय अपराध है।
(अगले अंक में: धारा २११, २१२ और २१३ – लोक सेवक को विधिक रूप से दी जाने वाली सूचना न देना, झूठी सूचना देना तथा लोक सेवक द्वारा विधिपूर्वक अपेक्षित शपथ या प्रतिज्ञान करने से इनकार करना से संबंधित अपराधों को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझेंगे।)
