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फोर्टिस अस्पताल की ‘फोर्टिस है ना’…पहल के तहत सीपीआर जागरूकता और प्रशिक्षण अभियान

सामना संवाददाता / मुंबई

समुदाय की आपातकालीन प्रतिक्रिया और तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, फोर्टिस अस्पताल मुंबई ने अपनी चल रही ‘फोर्टिस है ना’ पहल के तहत सीपीआर जागरूकता और प्रशिक्षण अभियान की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य नागरिकों को महत्वपूर्ण जीवन-रक्षक कौशल से लैस करना है, ताकि यह संदेश सुदृढ़ हो कि किसी भी आपातस्थिति में-फोर्टिस आपके साथ है।
यह समन्वित प्रशिक्षण अभियान भारत भर के सभी फोर्टिस अस्पतालों में एक साथ आयोजित किया गया, जिसमें दो ग्लेनीगल्स अस्पतालों ने भी भाग लिया। इससे यह नेटवर्क द्वारा आयोजित अब तक का सबसे बड़ा सीपीआर प्रशिक्षण अभियान बन गया। इस अभियान ने अस्पतालों और सामुदायिक स्थानों में 2,500–3,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया।
प्रत्येक 90 मिनट के सत्र में सीपीआर तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन, चोकिंग रेस्क्यू के तरीके और इमरजेंसी मेडिसिन विशेषज्ञों, प्रशिक्षित नर्सों और प्रमाणित सीपीआर प्रशिक्षकों द्वारा एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर शामिल था। प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाणपत्र और एक फ़र्स्ट एड बुकलेट भी प्रदान की गई, जिसमें आपातकालीन प्रतिक्रिया के मुख्य चरण बताए गए थे।
अस्पताल परिसर से आगे बढ़ते हुए, ये सत्र विभिन्न रेज़िडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस (RWAs), कॉरपोरेट्स, स्कूलों, जिम और स्थानीय संस्थानों के सहयोग से आयोजित किए गए। उद्देश्य यह था कि जीवन-रक्षक ज्ञान को सीधे समुदायों तक पहुंचाया जाए-छात्रों, कॉरपोरेट कर्मचारियों, फिटनेस ट्रेनर्स, ट्रैफिक पुलिस, टैक्सी ड्राइवरों और फर्स्ट रेस्पॉन्डर्स तक। ताकि लोग आपात स्थितियों में अधिक आत्मविश्वास और क्षमता के साथ प्रतिक्रिया दे सकें।
फोर्टिस हेल्थकेयर की चीफ ग्रोथ एवं इनोवेशन ऑफिसर, डॉ. ऋतु गर्ग ने कहा कि आपात स्थितियां कहीं भी हो सकती हैं। घर पर, कार्यस्थल पर या सड़क पर। इस सीपीआर प्रशिक्षण अभियान के माध्यम से, हम हर व्यक्ति को वह आत्मविश्वास देना चाहते हैं कि वे चिकित्सा सहायता पहुंचने से पहले उन महत्वपूर्ण शुरुआती पलों में सही प्रतिक्रिया दे सकें। यह पहल हमारी ‘फोर्टिस है ना’ प्रतिबद्धता का मुख्य हिस्सा है-समुदाय में विश्वास और तैयारी को मजबूत करना। फोर्टिस हॉस्पिटल्स, महाराष्ट्र की बिजनेस हेड, डॉ. एस. नारायणी ने कहा, “इस सीपीआर पहल के माध्यम से, हम चाहते हैं कि नागरिक चिकित्सा आपात स्थितियों के दौरान आत्मविश्वास और सक्षम महसूस करें। जब लोग शुरुआती महत्वपूर्ण मिनटों में सही कदम उठाते हैं, तो जीवित बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इस प्रशिक्षण को सीधे समुदायों तक ले जाकर, हम एक सुरक्षित और बेहतर-तैयार महाराष्ट्र बनाने में योगदान दे रहे हैं।”
फोर्टिस अस्पताल मुलुंड के डायरेक्टर-इमरजेंसी मेडिसिन, डॉ. संदीप गोरे ने कहा, “आपात स्थिति में हर सेकंड महत्वपूर्ण होता है। जब दिल की धड़कन रुक जाती है, तो आसपास मौजूद लोगों की तुरंत प्रतिक्रिया जीवन और मृत्यु के बीच अंतर पैदा कर सकती है। सीपीआर केवल एक मेडिकल स्किल नहीं, बल्कि एक जीवन कौशल है, जिसे हर किसी को आना चाहिए। अध्ययनों से पता चला है कि लगभग 80% कार्डिएक अरेस्ट अस्पतालों के बाहर होते हैं, यानी जीवित बचने की संभावना तुरंत बाईस्टैंडर हस्तक्षेप पर निर्भर करती है। लेकिन भारत में 2% से भी कम लोग सीपीआर (कार्डियोपल्मनरी रिससिटेशन) में प्रशिक्षित हैं, जबकि पश्चिमी देशों में यह संख्या करीब 18% है। प्रशिक्षण और जागरूकता की कमी जीवित बचने की दर को काफी कम कर देती है। हजारों नागरिकों को सीपीआर और बेसिक लाइफ सपोर्ट में प्रशिक्षित करके, हम देशभर में फ़र्स्ट रेस्पॉन्डर्स का एक मज़बूत नेटवर्क बनाना चाहते हैं।”
‘फोर्टिस है ना’ अभियान, फोर्टिस की व्यापक पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य आपातकालीन और ट्रॉमा सेवाओं को बढ़ावा देना है, जिसमें समय पर हस्तक्षेप, विशेषज्ञ देखभाल और समुदाय का विश्वास शामिल है। अस्पताल अनुभवी पेशेवरों और अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ विश्व-स्तरीय आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह आपातकालीन अभियान अस्पताल की 24×7 आपातकालीन और ट्रॉमा देखभाल उपलब्ध कराने की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

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