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लखनऊ में 29 वर्षों से हिंदुओं को ईसाई बना रहा था डेनियल, शिकायत पर पुलिस ने दबोचा!

मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ

राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज के भरसवा गांव में हिंदुओं को ईसाई बनाने के आरोप में पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरोह के सरगना डेनियल के खाते में हर माह दो से तीन लाख रुपये पुड्डूचेरी से फंडिंग की जाती थी। इसी रकम से आरोपी ग्रामीणों को घरेलू सामान खरीदकर देता था। वह रुपयों का लालच देकर लोगों का धर्मांतरण कराता था। एडीसीपी साउथ रल्लापल्ली वंसथ कुमार के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ शिकायतकर्ता अमित कुमार की तहरीर पर एफआईआर दर्ज की गई है।गिरोह में शामिल मूलरूप से तमिलनाडू और वर्तमान में हरिकंशगढ़ी में रहने वाले डेनियल, उसकी पत्नी सुबला, भरसवा निवासी चंद्रभान, उसकी पत्नी आरती, ठाकुरखेड़ा निवासी शीला, अजय रावत और भरसवा की सीमा को गिरफ्तार किया गया है। छानबीन में सामने आया है कि अमित कुमार पर आरोपी धर्मांतरण का दबाव बना रहे थे। आरोपी बार-बार उनपर चर्च चलने का दबाव डालते थे।
आरोपियों ने कहा था कि धर्म बदलने पर संतान की प्राप्ति होगी। अमित के इंकार करने पर आरोपियों ने धमकाया था और बोला कि वे किसी से डरते नहीं हैं। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वह लोगों को भड़काकर, लालच देकर और डराकर उनका धर्म परिवर्तन कराते हैं। अब तक की पड़ताल में आरोपियों ने भरसवा और आसपास के गांव के 60 लोगों का धर्म बदलने की बात स्वीकार की है।छानबीन में सामने आया है कि गिरोह ऐसे लोगों की तलाश करता था जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। यही नहीं, ऐसे लोगों को ज्यादा प्राथमिकता दी जाती थी, जिनका इलाज चल रहा हो। इसके बाद उन लोगों के घर जाकर पहले आर्थिक यहायता दी जाती थी और फिर उनका ब्रेनवॉश किया जाता था। गिरोह विवाह आदि में भी लोगों को रुपये देकर अपने झांसे में लेता था।पुलिस ने 15 पीड़ितों के बयान दर्ज किए हैं। ग्रामीणों ने बताया है कि गिरोह के लोग अक्सर रात में चारपहिया वाहन से गांव-गांव जाते थे। चिंहित लोगों के घर जाकर बैठक करते थे और उन्हें धर्मांतरण के लिए तैयार करते थे। कई बार बाहर से भी लोगों को बुलाया जाता था, जो ग्रामीणों को नौकरी, पैसा और अन्य चीजों का प्रलोभन देकर उकसाते थे। एक पीड़ित ने बयान में बताया है कि उसे घुटनों के दर्द के उपचार के नाम पर चर्च ले जाया गया था। बाद में ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाया गया। पीड़ित ने जब उसने इसका विरोध किया तो आरोपियों से उसका विवाद हो गया। पुलिस का कहना है कि गिरोह सुनियोजित तरीके से प्रलोभन, कपटपूर्ण साधनों एवं मानसिक दबाव के माध्यम से धर्म परिवर्तन कराता है।
पूछताछ में डेनियल ने पुलिस को बताया कि बचपन में उसका नाम बाला सुब्रमण्यम था। 16 वर्ष की आयु में उसकी मुलाकात सुबला से हुई, जो कन्याकुमारी की थी। सुबला ईसाई धर्म को मानने वाली थी। सुबला से शादी करने के लिए उसके कहने पर बाला सुब्रमण्यम ने हिंदु धर्म त्यागकर ईसाई धर्म अपना लिया। इसके बाद सुबला ने उससे शादी की। आरोपी ने बताया कि एफजीपीसी चर्च कन्याकुमारी के आदेश पर वह धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए वर्ष 1998 में लखनऊ आया था। बीते 29 साल से आरोपी धर्मांतरण का काम करा रहा था।पुलिस ने जब शिकंजा कसा तो आरोपी ने बताया कि चर्च की ओर से उसका वाराणसी सर्किल का पास्टर बनाया गया था। चर्च ने उसे और उसके साथियों को हर साल का टारगेट दिया था। टारगेट पूरा करने के लिए आरोपी को सारी सुविधाएं दी जाती थीं।आरोपी ने बताया कि उसे लोगों की बीमारी का इलाज कराने के बहाने उन्हें हिंदु से ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर करने के लिए कहा गया था। चर्च ने आरोपियों को अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने का लक्ष्य दिया था। पुलिस ने आरोपियों के पास से एक बोलेरो, धार्मिक पुस्तक, धर्मांतरण से जुड़ी पुस्तकें, बैंक स्टेटमेंट और विवाह आदि से जुड़े दस्तावेज मिले हैं।”

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