– मालवणी मामले में दोषियों को अबतक सजा नहीं
– कांग्रेस ने किया श्वेत पत्र की मांग
सामना संवाददाता / मुंबई
पुणे में जहरीली शराब पीने से २२ लोगों की मौत के बाद राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं तेलंगाना के सह-प्रभारी सचिन सावंत ने आरोप लगाया है कि वर्ष २०१५ के मालवणी जहरीली शराब कांड से सरकार ने कोई सबक नहीं लिया, जिसके कारण पुणे जैसी त्रासदी दोबारा सामने आई।
तिलक भवन में मीडिया से बातचीत में सावंत ने कहा कि मालवणी में जहरीली शराब पीने से १०६ लोगों की मौत के बाद राज्य सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। समिति ने अवैध शराब निर्माण, मिथेनॉल की आपूर्ति और शराब माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की थीं। गृह विभाग ने १७ फरवरी २०२२ को इन सिफारिशों को लागू करने के लिए सभी संबंधित विभागों को निर्देश भी जारी किए थे, लेकिन उनका प्रभावी पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि समिति ने मिथेनॉल के उत्पादन और परिवहन पर कड़ी निगरानी, पुलिस और राज्य उत्पाद शुल्क विभाग के संयुक्त अभियान, अवैध शराब भट्ठियों के स्थायी उन्मूलन तथा संगठित अपराधियों के खिलाफ एमपीडीए कानून के तहत कठोर कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसके बावजूद पुणे में जहरीली शराब से २२ लोगों की मौत होना सरकार की विफलता को उजागर करता है।
दुर्घटना के बाद जागती है सरकार
यदि अब सरकार एफडीए एक्ट और अन्य कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की बात कर रही है तो इसका अर्थ है कि अब तक ऐसी कार्रवाई नहीं की जा रही थी। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार हर बार किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागती है? कांग्रेस नेता ने मांग की कि मालवणी जांच समिति की सभी सिफारिशों पर अब तक हुई कार्रवाई का श्वेतपत्र जारी किया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि कौन-कौन सी सिफारिशें अभी तक लंबित हैं। उन्होंने कहा कि केवल अधिकारियों को निलंबित कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
