– सुसाइड नोट में खुली साहूकारों की पोल
मुंबई की भागती-दौड़ती जिंदगी में जहां हर कोई सपनों की ट्रेन पकड़ने दौड़ता है, वहां एक पिता की मौत ने सबको ठिठका दिया। ये घटना है पिछले साल दिसंबर महीने की, जब सदाशिव माने, ५७ साल के महाराष्ट्र उत्पाद शुल्क विभाग के संविदा कर्मचारी, जिनकी जिंदगी सायन के प्रतीक्षा नगर में एक छोटे से घर तक सिमट गई थी। एक दिन सुबह जीटीबी नगर रेलवे स्टेशन के ट्रैक पर उनका शरीर मिला। लोकल ट्रेन के आगे कूदकर उन्होंने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी। जेब में सुसाइड नोट, जिसमें साहूकारों के नाम और यातना की दास्तां लिखी थी। ये सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि कर्ज के जाल में फंसे करोड़ों भारतीयों की चीख है। सदाशिव की कहानी दिल दहला देती है, क्योंकि ये हर उस मेहनतकश की कहानी है जो कोरोना की मार से उबरने की कोशिश करता है, लेकिन साहूकारों के लालच में डूब जाता है।
अमानूष साहूकार
सदाशिव का परिवार छोटा सा था। पत्नी, २३ साल का बेटा और एक बेटी। वो सुबह ड्यूटी जाते, शाम को लौटते। लेकिन २०२० के लॉकडाउन ने सब बदल दिया। नौकरी अनिश्चित, घर खर्च। सदाशिव ने सोचा, दूध का बिजनेस शुरू करेंगे। परिवार को उम्मीद की नई किरण दिखाई दी। लेकिन बाजार ने धोखा दिया। घाटा लगा, दुकान बंद हो गई। पैसे की जरूरत पड़ी तो सायन कोलीवाड़ा की मनीषा देठे से कर्ज लिया। शुरू में साढ़े तीन लाख रुपये, ९ प्रतिशत मासिक ब्याज पर। ‘पापा ने कहा था, जल्दी चुका देंगे,’ बेटा याद करता है, आंसू छलकाते हुए। लेकिन ब्याज की आग भड़की। मूल राशि ७ लाख हो गई, किस्तें ४९,००० रुपये महीना। सदाशिव ने एक बार ३ लाख चुकाए, बेटे ने दूसरों से ३ लाख उधार लिए। फिर ५ लाख और लेकर दिए। लेकिन मनीषा और पति सुधीर का लालच थमा नहीं। वे घर आते, चिल्लाते, परिवार के सामने बार-बार अपमान करते, धमकियां देते। सदाशिव रातों को जगते, पसीना पोंछते। ‘वे हमें जीने नहीं दे रहे थे,’ पत्नी फफकती है।
मौत को लगाया गले
उस रात सदाशिव घर नहीं लौटे। पत्नी ने फोन किया, पुलिस की आवाज आई, ‘दुर्घटना हुई है।’ बेटा दौड़ा अस्पताल पहुंचा। केईएम में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सुसाइड नोट ने सब उजागर कर दिया। साहूकारों की यातना असहनीय हो गई। वडाला रेलवे पुलिस ने मनीषा, सुधीर और एक अन्य महिला के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने, अपमान और बीएनएस की धाराओं में केस दर्ज किया। सदाशिव की मौत ने कई सवाल उठाए। कितने सदाशिव साहूकारों की भेंट चढ़ रहे हैं? कोरोना ने लाखों को कर्ज में धकेला, लेकिन सिस्टम कहां है? विशेषज्ञ कहते हैं, बैंक लोन लें, सरकारी स्कीम्स अपनाएं।
अगर फंसे हैं, तो पुलिस में शिकायत करें।
