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दिल्ली विस्फोट कांड के आरोपी लखनऊ में भी धमाकों की तैयारी में थे

-डॉ. शाहीन के साथ गुप्त ठिकानों की तलाश कर रहे थे आतंकी

मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ

दिल्ली के लालकिला विस्फोट कांड की आरोपी डॉ. शाहीन और उसका साथी मुजम्मिल लखनऊ में गुप्त ठिकाने बनाकर सिलसिलेवार धमाकों की साजिश रच रहे थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों 25 से 30 अगस्त के बीच खंदारी बाजार, लालबाग और आईआईएम रोड स्थित डॉ. परवेज के मकान में रुके थे। इस दौरान वे शहर की अविकसित कॉलोनियों में विस्फोटक तैयार करने के लिए सुरक्षित स्थान तलाश रहे थे।
जांच में सामने आया कि लखनऊ में आतंकियों की मदद डॉ. परवेज कर रहा था। वह स्थानीय स्तर पर इनके नेटवर्क को मजबूत करने में जुटा था। एजेंसियों के मुताबिक, डॉ. शाहीन और मुजम्मिल ने परवेज तथा अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर विधान भवन, बापू भवन (सचिवालय), बड़ा इमामबाड़ा, लालबाग और अमीनाबाद जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों की रेकी भी की थी। इसके बाद शहर में सिलसिलेवार धमाकों की साजिश रची गई।
पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि शाहीन के भाई डॉ. परवेज ने अपने करीबियों की मदद से घातक विस्फोटक ट्राइएसीटोन ट्राइपरॉक्साइड (टीएटीपी) तैयार करने के लिए दुकानों की तलाश कराई थी। बीते 10 नवंबर को दिल्ली विस्फोट कांड के बाद शाहीन की गिरफ्तारी के पश्चात पूछताछ में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच एजेंसियों को पता चला कि इस साजिश के तार लखनऊ से भी जुड़े हैं। इसके बाद खुफिया एजेंसियों ने नवंबर में खंदारी बाजार और आईआईएम रोड स्थित परवेज के घर के आसपास छापेमारी की।
इसके अलावा इंटीग्रल विश्वविद्यालय, जहां परवेज असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत था, एरा हॉस्पिटल समेत कई स्थानों पर भी छापेमारी की गई। कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
एजेंसियों की जांच में यह भी सामने आया कि शाहीन और उसका भाई परवेज अलकायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) के आतंकी मॉड्यूल ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ से जुड़े हुए थे। एजेंसियों ने पहले खंदारी बाजार स्थित शाहीन के घर पर छापा मारकर कई अहम दस्तावेज जब्त किए थे। तड़के पांच बजे से दोपहर 12 बजे तक उसके पिता शाहिद सईद अंसारी से पूछताछ की गई थी। इसके बाद आईआईएम रोड स्थित डॉ. परवेज के घर पर छापेमारी की गई, जहां से मोबाइल फोन, दस्तावेज, कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और एक कार बरामद की गई।
जांच के दौरान एजेंसी के अधिकारी इंटीग्रल विश्वविद्यालय भी पहुंचे थे। वहां परवेज के कक्ष की अलमारी में रखे दस्तावेजों को भी जब्त किया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह नेटवर्क केवल लखनऊ और दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि कानपुर, फतेहपुर, बिंदकी, जहानाबाद, कानपुर देहात, उन्नाव तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक फैला हुआ था। एटीएस ने इन सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी थी, जिसके बाद कई और महत्वपूर्ण खुलासे हुए।

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