मुख्यपृष्ठस्तंभदिल्ली लाइव : अब देश की करेंसी भी छापेगी अडानी की कंपनी!

दिल्ली लाइव : अब देश की करेंसी भी छापेगी अडानी की कंपनी!

अरुण कुमार गुप्ता

उद्योगपति गौतम अडानी ऐसे ही थोड़े न आगे बढ़ते जा रहे हैं। पिछले दिनों खबर आई कि आरबीआई अब पॉलीमर के नोट छापने की योजना बना रही है। इससे पहले ही भविष्य दृष्टा गौतम अडानी ने आरबीआई का मूड भांप लिया था। अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज ने २०२१ में मुद्रा पेट्रोकेम लिमिटेड नाम से एक कंपनी रजिस्टर कराई। मतलब प्लास्टिक और पॉलीमर बनाने वाली कंपनी। इसी साल कंपनी ने अप्रूवल लेने की प्रक्रिया शुरू की थी और सितंबर २०२२ तक सभी अप्रूवल मिल गए। यहां यह ध्यान देनेवाली बात है कि मुश्किल से मिलनेवाला अप्रूवल मिनिस्ट्री आफ फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज से भी क्लियरेंस मिल गया। नवंबर २०२२ ने अडानी में घोषणा कर दी कि गुजरात के मुद्रा में ३५,००० करोड़ की लागत से पेट्रोल केमिकल प्लांट बनाने जा रहे हैं और जुलाई २०२३ में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की लीडरशिप वाली बैंक के कंसोर्टियम ने अडानी को १४,००० करोड़ की क्रेडिट लाइन दे दी। क्रेडिट लाइन का मतलब आपके नाम से १४,००० करोड़ अलग से रख दिया जाएगा। आपकी जब मर्जी हो, जितना मर्जी हो उसमें से निकाल सकते हैं। वह भी इंटरेस्ट प्रâी। बाप का माल है। अब कहा जा रहा है कि दिसंबर २०२६ तक मुद्रा पेट्रोकेम काम करना शुरू कर देगी यानी जब तक आरबीआई की योजना अमल में लाई जाएगी, तब तक अडानी की कंपनी शुरू हो जाएगी। अडानी की दूर दृष्टि और आरबीआई की योजना को लेकर अब आप सारी बात समझ गए होंगे। यहां यह भी बता दें कि मोदी जी ने नोटबंदी के बाद वैâशलेस इकोनॉमी का शगूफा छोड़ा था, सोचिए आगे क्या होनेवाला है।
एक कदम अनपढ़ देश की ओर!
देश में इस समय सीबीएसई, एनटीए, इलेक्शन कमिशन और एथेनॉल पर काफी चर्चा हो रही है। पहले से पेपर की चेकिंग नहीं हो पा रही है। दूसरा प्रतियोगी परीक्षा नहीं करवा पा रहा है। पेपर लीक हो रहे हैं। तीसरे से फेयर इलेक्शन की उम्मीद ही लोग छोड़ दिए हैं। इसके अलावा गोदी मीडिया ने तो जर्नलिज्म ही खत्म कर दिया है। गडकरी जी लोगों को इथेनॉल पिला रहे हैं। मतलब लोगों के सामने काफी समस्याएं और सवाल हैं। एक छात्र ने पेपर को लेकर सवाल किया तो उसे पाकिस्तानी बोल दिया गया। पाकिस्तान वाले तो सीधे बम फोड़ते हैं सीबीएसई की परीक्षा क्यों देंगे। सीबीएसई एक सब्जेक्ट के पेपर के रिवैल्युएशन के लिए `८००० ले रहा है। सीधे बच्चों से किडनी मांग ले तो अच्छा है। उधर, एनटीए के निदेशक ने बोल दिया कि पेपर लीक नहीं हुआ, बस कुछ सवाल बाहर आ गए। ऐसे में यही कहा जा सकता है कि टाइटेनिक डूबा नहीं था, बस पानी के अंदर चला गया था। झूठ बोलने में भी ये लोग शर्म नहीं कर रहे हैं। पिछले १० साल में एक लाख से ज्यादा स्कूल बंद हुए और ८० से ज्यादा पेपर लीक हुए। इन्हें खुद शिक्षा प्रणाली पर भरोसा नहीं, तभी तो अपने बच्चों को विदेश में पढ़ा रहे हैं और देश की जनता को अनपढ़ बना रहे हैं। जनता अनपढ़ रहेगी तभी तो वोट बैंक रहेगी। पढ़ लिख गई तो नेताओं के लिए समस्या हो जाएगी।

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