अरुण कुमार गुप्ता
पिछले कुछ समय से लगातार भारतीय रुपए की कीमत डॉलर के मुकाबले गिरती जा रही है। गिरते हुए रुपए की कीमत को बचाने के लिए आरबीआई ने एक सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार ८ अरब डॉलर फूंक दिए। यह बात आरबीआई ने खुद कही है। अमूमन पूरी दुनिया डॉलर में ही ट्रेड करती है। हर एक देश डॉलर का रिजर्व रखता है ताकि इमरजेंसी में काम आए। इसको ऐसे समझिए जब रुपए की वैल्यू गिर रही होती है और उसे बचाने का कोई रास्ता नहीं बचता तब अपने डॉलर के रिजर्व में से डॉलर को बेचना शुरू करता है। अब इसको आम भाषा में समझिए, जब घर का मुखिया नालायक हो तो घर की गृहिणी घर चलाने के लिए अपने गहने बेचने लगती है, लेकिन यह तात्कालिक उपाय है, परमानेंट सॉल्यूशन नहीं है। परमानेंट सॉल्यूशन यह है कि नालायक मुखिया या तो काम करे या तो उसे घर से निकाल दिया जाए। आज कुछ ऐसा ही हमारे देश में हो रहा है। घर की गृहिणी यानी आरबीआई कब तक अपने गहने बेचकर घर संभालने का प्रयास करेगा। यह सवाल काफी गंभीर है।
देश पर ‘शनिदृष्टि’!
‘सनातन’ मान्यता में शनि ग्रह का जिक्र है। जिसका नाम सुनकर लोग डर जाते हैं। कुछ ऐसा ही हाल इस समय देश में है, क्योंकि लगता है कि देश पर शनि ग्रह कुंडली मारकर बैठा हुआ है। हर दिन पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, पीएनजी के दाम बढ़ने की वजह से जनता त्राहिमाम कर रही है। यहां एक बात और ध्यान देने वाली है कि जब डॉक्टर मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे तो आज के मुकाबले कच्चे तेल की कीमत ज्यादा थी, लेकिन पेट्रोल, डीजल की कीमतें कम थीं। जानकारों का कहना है कि पेट्रोल, डीजल के दाम भविष्य में डेढ़ सौ रुपए तक जा सकते हैं। देश के हर हिस्से में तेल के लिए पेट्रोल पंपों पर मारामारी हो रही है, लेकिन उसकी सुनने वाला कोई नहीं है। भारत का पुराना मित्र रूस और व्यापार पार्टनर ईरान सस्ते में तेल देने को तैयार हैं, लेकिन हमारे ‘शनि महाराज’ लेने को तैयार नहीं हैं। जनता महंगाई से रो रही है तो उसे रोने दो। क्या फर्क पड़ता है। गद्दी मिली हुई है, हिंदुस्थान से मन ऊब गया तो ८,००० करोड़ के प्लेन में विदेश घूम आएंगे। ऐसे में सवाल है कि ‘शनि महाराज’ के सामने क्या मजबूरी है, जिससे वह अमेरिका के सामने साष्टांग लेटे हुए हैं।
