मुख्यपृष्ठसमाचारपेपर लीक पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज!

पेपर लीक पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज!

-जंतर-मंतर पर युवा हुंकार

-आंदोलन को मिला राजनीतिक बल

नई दिल्ली। प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा युवा आंदोलन अब राजनीतिक रूप लेने लगा है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने आंदोलन में शामिल होकर युवाओं के संघर्ष को समर्थन देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी भीषण गर्मी में कई दिनों से बैठे हैं और उनकी मांगों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी नामक युवा समूह कर रहा है। इसका आरोप है कि लगातार पेपर लीक, परीक्षाओं को स्थगित या रद्द किए जाने और परिणामों में देरी से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जांच और गिरफ्तारियां पर्याप्त नहीं हैं; परीक्षा व्यवस्था की विफलता के लिए राजनीतिक जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। आंदोलन को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भी समर्थन मिला है, जिन्होंने जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू की। विरोध केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। आंदोलनकारी नीट-यूजी पेपर लीक के साथ सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को भी उठा रहे हैं। इससे यह विवाद छात्रों की शिकायत से आगे बढ़कर देश की परीक्षा और भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता का प्रश्न बन गया है।
युवाओं का सवाल, सरकार कब देगी जवाब?
राजनीतिक दलों के समर्थन से आंदोलन को राष्ट्रीय मंच जरूर मिल रहा है, लेकिन इससे मूल मुद्दा पीछे नहीं छूटना चाहिए। असली प्रश्न यह है कि प्रश्नपत्र सुरक्षित क्यों नहीं हैं, जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई और ईमानदारी से तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को बार-बार परीक्षा क्यों देनी पड़ रही है। इस्तीफा राजनीतिक मांग हो सकती है, लेकिन सरकार को जवाबदेही से बचने का अधिकार नहीं है। युवाओं का भरोसा केवल बयान या जांच समिति से नहीं लौटेगा; उसके लिए समयबद्ध जांच, दोषियों की सजा और ऐसी परीक्षा प्रणाली चाहिए, जिसमें मेहनत बिकाऊ प्रश्नपत्र के सामने हार न जाए।
सुधार के सरकारी दावे खोखले
दूसरी ओर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विपक्ष और आंदोलनकारी संगठनों पर छात्रों की चिंताओं को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जांच एजेंसियां पेपर लीक मामलों की पड़ताल कर रही हैं और परीक्षा व्यवस्था में सुधार किए जा रहे हैं। भाजपा नेताओं ने आंदोलनकारी समूह की भाषा और कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं।

अन्य समाचार