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लोकतंत्र को लगी ‘आग!’ … विजय समर्थक का आत्मदाह! …तमिलनाडु की राजनीति में सनसनी

सामना संवाददाता / चेन्नई
तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक अनिश्चितता अब खतरनाक भावनात्मक उबाल में बदलती दिख रही है। टीवीके प्रमुख दलपति विजय के मुख्यमंत्री बनने में हो रही देरी से आहत एक समर्थक ने कथित तौर पर आत्मदाह की कोशिश की। रिपोर्टों के अनुसार, तिरुनेलवेली जिले के पास टीवीके से जुड़े एक ४४-४५ वर्षीय कार्यकर्ता ने खुद को आग लगा ली, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गया। विजय के शपथ ग्रहण और सरकार बनाने के रास्ते में राज्यपाल द्वारा पैदा किए गए सियासी पेच से वो खफा था।
तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा ११८ है, जबकि रिपोर्टों के अनुसार, विजय के पास पर्याप्त संख्या को लेकर अब भी असमंजस बना हुआ है। हालांकि, देर रात आंकड़ा १२० तक पहुंचने की खबर है। विजय की पार्टी टीवीके राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में उभरी है, लेकिन सरकार गठन के लिए सहयोगी दलों और निर्दलियों के समर्थन पत्रों की विश्वसनीयता तथा संख्या को लेकर विवाद जारी है।

सदन के पटल पर अंतिम परीक्षण
सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में यही सिद्धांत स्थापित किया है कि सरकार के बहुमत का अंतिम परीक्षण सदन के पटल पर ही होगा। तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर राज्यपाल का अड़ियल रुख लोकतांत्रिक मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि दलपति विजय सबसे बड़े दल के नेता के रूप में दावा पेश कर रहे हैं और समर्थन जुटाने की स्थिति में हैं तो उन्हें शपथ दिलाकर समयबद्ध फ्लोर टेस्ट का निर्देश देना ही संवैधानिक सिद्धांत है।

यह है राज्यपाल का काम
राज्यपाल यह जानते हैं कि बहुमत साबित करने की असली जगह विधानसभा है, राजभवन नहीं। राज्यपाल का काम समर्थन-पत्रों के आधार पर प्रथम दृष्टया संतुष्टि बनाकर सबसे संभावित दावेदार को शपथ दिलाना और फिर शीघ्र फ्लोर टेस्ट करवाना है; वे स्वयं ‘बहुमत परीक्षण केंद्र’ नहीं बन सकते।

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