सामना संवाददाता / मुंबई
पूज्य कथावाचक श्रद्धेय शांतिदूत श्री देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज के मुखारविंद से भागवत कथा का रविवार को भायंदर में भव्य शुभारंभ हुआ। भायंदर पूर्व में नवघर रोड स्थित हनुमान मंदिर में महाराजश्री ने पूजन किया। वहां से भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों की संख्या में महिलाएं, माताएं और बहनें कलश लेकर शामिल हुईं। बारिश की फुहारों से बेफिक्र श्रद्धालुओं का यह कारवां देखकर महाराजश्री ने भी अपनी छतरी हटवा दी और उन्होंने उमंग के साथ श्रद्धालुओं का उत्साहवर्धन किया। महाराजश्री ने भी बारिश में भीगते हुए वाहनरथ से उतरकर जुलूस में शामिल लोगों के साथ पैदल यात्रा पूरी की। इस दौरान बैंडबाजे, ढोल-नगाड़ों की धुनों व भक्ति गीतों पर श्रद्धालु झूमते दिखे। यह विशाल कलश यात्रा ‘राधे-राधे’ और ‘जय श्रीकृष्ण’ के नारों के साथ भायंदर में इंद्रलोक परिसर स्थित बालासाहेब ठाकरे मैदान में बने विशाल कथापंडाल पहुंची। महाराजश्री के सानिध्य में भागवत महापुराण को स्थापित किया गया। सांय के सत्र में पहले ही दिन महाराजश्री ने भागवत के श्लोकों के साथ कथा का शुभारंभ किया। रविवार को पहले ही दिन श्रद्धालु बड़ी संख्या में कथा सुनने के लिए पहुंचे। इस अवसर पर विधायक नरेंद्र मेहता व अनेक गणमान्य व आम श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। महाराजश्री ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया और मुंबईवासियों के श्रद्धाभाव और भक्ति की खूब प्रशंसा की। ठाकुर महाराज ने कहा कि देवउठनी एकादशी के दिन कलश यात्रा और भागवत कथा में शामिल होना अत्यंत ही पुण्य का कार्य है। उन्होंने कहा कि पावन कार्तिक मास के अगले पांच दिन भी बहुत ही पुण्यकारी हैं। इस दौरान धार्मिक उपक्रमों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। महाराजश्री के निजी प्रबंधक एवं विश्व शांति मिशन के सचिव विजय शर्मा ने बताया कि वृंदावन में प्रियाकांतजू मंदिर एवं आश्रम के निर्माण के बाद महाराजश्री अब गौशाला और गुरुकुलम् की स्थापना के लिए भी निरंतर प्रयत्नशील हैं। श्रद्धालुओं के सहयोग से यह प्रकल्प जल्दी ही पूर्ण होगा। शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि सनातन संस्कृति की रक्षा, युवाओं को संस्कारवान बनाने तथा धर्म से युवाओं को जोड़कर भारत को विश्वगुरु बनाने और विश्व शांति फैलाने का संदेश देने के लिए भी देवकीनंदन ठाकुर महाराज विख्यात हैं। वे शास्त्र आधारित व सात्विक जीवन शैली और परमार्थ की निरंतर प्रेरणा देते हैं। महाराजश्री की भागवत कथा यहां 8 नवंबर तक चलेगी।
