मुख्यपृष्ठसमाचारकलेक्टर को गुमराह कर रहे जिला आयुष अधिकारी!

कलेक्टर को गुमराह कर रहे जिला आयुष अधिकारी!

स्मरण पत्र के बाद भी दिया गोलमाल जवाब, कार्रवाई से बचने की कोशिश?

जिले में मेडिकल स्टोर और फर्जी वैद्य के खिलाफ की गई शिकायतों के मामले में जिला आयुष अधिकारी की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। कलेक्टर कार्यालय से स्पष्ट प्रतिवेदन मांगे जाने और बाद में स्मरण पत्र जारी होने के बावजूद जिला आयुष अधिकारी ने ऐसा जवाब प्रस्तुत किया, जिसमें स्मरण पत्र का उल्लेख तक नहीं किया गया। इससे पूरे मामले में कलेक्टर को गुमराह किए जाने की आशंका गहरा गई है।
दरअसल, जिला सतर्कता अधिकारी ने 15 अप्रैल 2026 को पत्र क्रमांक 4645 जारी कर जिला आयुष अधिकारी से चार महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्ट प्रतिवेदन मांगा था। इनमें बिना बिल और डॉक्टर के पर्चे के दवा बिक्री, फर्जी आयुर्वेदिक प्रैक्टिस तथा कार्रवाई नहीं होने जैसे गंभीर मुद्दे शामिल थे।
निर्धारित समय तक जवाब नहीं मिलने पर 8 मई 2026 को जिला सतर्कता अधिकारी द्वारा स्मरण पत्र जारी किया गया। स्मरण पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया कि कलेक्टर द्वारा मांगी गई जानकारी निर्धारित तिथि तक उपलब्ध नहीं कराई गई है, जो आदेशों की अवहेलना को दर्शाता है।
इसके बाद 12 मई 2026 को जिला आयुष अधिकारी ने जो स्पष्टीकरण भेजा, उसमें केवल 15 अप्रैल के पत्र का उल्लेख किया गया, जबकि 8 मई को जारी स्मरण पत्र का जिक्र तक नहीं किया गया। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या स्मरण पत्र को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया या फिर मामले को हल्का दिखाने का प्रयास किया गया।
जवाब में जिम्मेदारी से बचने का प्रयास?
जिला आयुष अधिकारी ने अपने प्रतिवेदन में कई बिंदुओं पर सीधे जवाब देने से बचते हुए जिम्मेदारी अन्य विभागों पर डालने का प्रयास किया। मेडिकल स्टोर पर बिना बिल और पर्चे के दवा बिक्री के मामले को औषधि प्रशासन विभाग का विषय बताया गया, जबकि फर्जी प्रैक्टिस के मामले में भी केवल “नियमानुसार कार्रवाई” की सामान्य बात कहकर औपचारिकता पूरी कर दी गई।
उठ रहे बड़े सवाल
* जब कलेक्टर कार्यालय ने स्पष्ट जानकारी मांगी थी, तो समय पर जवाब क्यों नहीं दिया गया?
* स्मरण पत्र जारी होने के बाद भी उसका उल्लेख जवाब में क्यों नहीं किया गया?
* क्या जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई से बचने और मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं?
अब देखने वाली बात होगी कि कलेक्टर कार्यालय इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और गोलमाल जवाब देने वाले जिला आयुष अधिकारी पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।

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