मुख्यपृष्ठधर्म विशेषमहा पुनीत पर्व है देव दिवाली

महा पुनीत पर्व है देव दिवाली

शीतल अवस्थी

कार्तिक अमावस्या को जिस तरह पृथ्वी लोक पर दीपोत्सव मनाया जाता है, उसी प्रकार कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवलोक में दीपावली मनाई जाती है। इसीलिए इस दिन को देव दीवाली कहा जाता है। इसी दिन सृष्टि की रक्षा करने के लिए भगवान श्रीहरि ने प्रलय काल में मत्स्य अवतार धारण किया था। कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान, दीप दान, हवन, यज्ञ आदि करने से सांसारिक पाप और ताप का शमन होता है। इस दिन किए जाने वाले अन्न, धन एव वस्त्र दान का भी बहुत महत्व बताया गया है। मान्यता यह भी है कि इस दिन व्यक्ति जो कुछ दान करता है वह उसके लिए स्वर्ग में संरक्षित रहता है, जो मृत्यु लोक त्यागने के बाद स्वर्ग में उसे पुन: प्राप्त होता है। त्रिदेवों ने इस दिन को महापुनीत पर्व कहा है।
वैसे तो वर्ष में लगभग १६ अमावस्याएं पड़ती हैं, पर वर्ष की सबसे काली और लंबी अमावस की रात्रि कार्तिक अमावस्या यानी दीपावली को माना गया है। उसके ठीक १५ दिन बाद कार्तिक मास की पूर्णिमा पड़ती है, जो अंधकार का नाश करती है। इस बार यह तिथि कल पड़ रही है। पुराणों के अनुसार, अषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी से भगवान विष्णु चार मास के लिए योगनिद्रा में लीन हो जाते हैं और फिर वे कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को जागते हैं। इसके चार दिन बाद अर्थात कार्तिक पूर्णिमा को समस्त देवता भगवान विष्णु और लक्ष्मीजी की एक साथ आरती उतारते हैं। कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी या त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह गंगा स्नान का दिन होता है। इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है, क्योंकि इस दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे। इस दिन भगवान विष्णु ने अपना पहला अवतार लिया था। मत्स्य पुराण के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा की सांध्य काल में भगवान का मत्स्यावतार हुआ था। महाभारत काल में हुए १८ दिनों के विनाशकारी युद्ध में योद्धाओं और सगे संबंधियों को देखकर जब युधिष्ठिर कुछ विचलित हुए तो भगवान श्रीकृष्ण पांडवों के साथ गढ़ खादर के विशाल रेतीले मैदान पर आए। कार्तिक शुक्ल अष्टमी को पांडवों ने स्नान किया और कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी तक गंगा किनारे यज्ञ किया। इसके बाद रात में दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए दीपदान करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। इसलिए इस दिन गंगा स्नान का और विशेष रूप से गढ़मुक्तेश्वर तीर्थ नगरी में आकर स्नान करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है। वैसे भी धार्मिक कार्यों के लिए कार्तिक माह सर्वश्रेष्ठ माना गया है। कार्तिक माह में शिव, चण्डी, सूर्य तथा अन्य देवों के मंदिरों में दीप जलाने तथा प्रकाश करने का बहुत महत्व माना गया है। कार्तिक मास में राधा-कृष्ण, विष्णु भगवान तथा तुलसी पूजा का अत्यंत महत्व है। ऐसा माना जाता है कि कार्तिक माह में सूर्य तथा चंद्रमा की किरणों का प्रभाव मनुष्य पर अनुकूल पड़ता है। यह किरणें मनुष्य के मन तथा मस्तिष्क को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं। इस दिन सुबह स्नान करने के बाद राधा-कृष्ण का तुलसी, पीपल, आंवले आदि से पूजन करना चाहिए। सभी देवताओं की परिक्रमा करने का महत्व मान गया है। सांयकाल में भगवान विष्णु की पूजा तथा तुलसी की पूजा करें। संध्या समय में दीपदान भी करना चाहिए। देव दीवाली के दिन दान का बहुत महत्व माना गया है। इस दिन रात्रि में दीप जलाना, रात्रि जागरण करते हुए भगवान की आराधना करना और तुलसी पूजन व तुलसी विवाह करना भी सुख, समृद्धि और शांति लाने वाला माना गया है। देवताओं में त्रिदेव के रूप में प्रसिद्द ब्रह्मा, विष्णु और महेश द्वारा कार्तिक पूर्णिमा को महापुनीत पर्व की संज्ञा दी गई है। भगवान विष्णु के निमित्त देवताओं द्वारा दीप जलाकर हर्ष व्यक्त करना ही देव दीपावली का रूप है। इस दिन गंगा स्नान, व्रत, दान, दीप दान, होम, यज्ञ आदि को विशेष महत्व दिया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन कन्यादान करने से संतान व्रत पूरा हो जाता है। जो श्रद्धालु कार्तिक पूर्णिमा से आरंभ करके प्रत्येक पूर्णिमा को व्रत रखते हुए चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं और श्रद्धानुसार दान आदि शुभ कर्म करते हैं, उनकी समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
आध्यात्मिक रूप से इसका विश्लेषण इस तरह से किया जा सकता है कि मनुष्य में छिपी आसुरी प्रवृत्तियों यानी काम, क्रोध और लोभ पर नियंत्रण और इनका शमन कर ही मनुष्य देव स्वरूप प्राप्त कर सकता है। सभी सुखों को प्रदान करने वाली इस पूर्णिमा तिथि को किया गया हर अनुष्ठान ईश्वर को प्रिय और स्वीकार्य होता है। विधि-विधान से की गई भगवान सत्यनारायण की पूजा से प्रतिष्ठा प्राप्त होती है। शिवजी का अभिषेक करने से स्वास्थ्य और दीर्घायु प्राप्त होती है। दीपदान करने से भय से मुक्ति मिलती है। सूर्य की आराधना से लोकप्रियता में वृद्धि होती है तथा शक्ति आराधना से पारिवारिक शांति प्राप्त होती है।

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