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पांच हजार में दिवाली या किसानों के जख्मों पर नमक?..फडणवीस सरकार पर बरसे किसान

 -हिंगोली में ₹5 हजार की मदद के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन

-पांच हजार रुपए में कैसी दिवाली मनाएगा किसान?

-हिंगोली में तहसील कार्यालय के सामने किसानों ने उड़ाए नोट, फडणवीस सरकार के खिलाफ फूटा गुस्सा; विधायक कैलास पाटील का सवाल-खेती का नुकसान 50 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर, फिर पांच हजार की अग्रिम मदद किस काम की?

सुनील ओसवाल / मुंबई

महाराष्ट्र में सूखे की मार झेल रहे किसानों के जख्मों पर मरहम लगाने के बजाय सरकार की पांच हजार रुपये की अग्रिम सहायता ने उनके गुस्से को और भड़का दिया है। दिवाली से पहले किसानों के बैंक खातों में पांच हजार रुपये जमा करने की घोषणा करने वाली फडणवीस सरकार के खिलाफ अब सड़कों पर नाराजगी दिखाई देने लगी है। हिंगोली जिले के गोरेगांव स्थित अपर तहसील कार्यालय के सामने किसानों ने पांच हजार रुपये के नोट उड़ाकर सरकार के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त किया और जमकर नारेबाजी की। किसानों के इस विरोध ने सरकार की राहत नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जिस किसान की पूरी फसल बर्बाद हो चुकी है, खेती की लागत डूब गई है और परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा है, वह सरकार के पांच हजार रुपये से आखिर क्या करेगा? क्या इतनी रकम से खेती का नुकसान भरपाई हो सकता है, कर्ज का बोझ कम हो सकता है या परिवार की दिवाली खुशहाल बन सकती है?
राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति और फसलों को हुए नुकसान के बीच सरकार ने दिवाली से पहले किसानों को पांच हजार रुपये की अग्रिम सहायता देने की घोषणा की है। लेकिन किसानों का कहना है कि यह मदद उनकी वास्तविक जरूरतों और हुए नुकसान के मुकाबले बेहद मामूली है। बीज, खाद, कीटनाशक, जुताई, सिंचाई और मजदूरी पर हजारों रुपये खर्च करने के बाद भी जब किसान के हाथ खाली रह जाते हैं, तब पांच हजार रुपये की सहायता को किस आधार पर पर्याप्त माना जा रहा है? गोरेगांव में किसानों द्वारा नोट उड़ाकर विरोध जताना इसी असंतोष का प्रतीक है। यह केवल पांच हजार रुपये की रकम का विरोध नहीं, बल्कि उस सरकारी व्यवस्था के प्रति नाराजगी है, जिससे संकट की घड़ी में किसानों को बड़ी राहत की उम्मीद थी।
शिवसेना के विधायक कैलास पाटील ने भी सरकार की घोषणा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसानों को प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये की सहायता मिलने की उम्मीद थी, तब सरकार केवल पांच हजार रुपये की अग्रिम मदद देकर अपनी जिम्मेदारी कैसे पूरी मान सकती है? पाटील ने कहा कि मराठवाड़ा के किसान सूखे की मार झेल रहे हैं और बड़े पैमाने पर खेती तथा फसलों का नुकसान हुआ है। ऐसे समय में इतनी कम राशि की घोषणा किसानों के साथ मजाक करने जैसी है।
विधायक पाटील ने महंगाई का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर तंज कसा कि जब तेल का डिब्बा 2,700 रुपये तक पहुंच गया है, तब पांच हजार रुपये में किसान अपने परिवार की दिवाली कैसे मनाए? सरकार को ही इसका जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सूखा घोषित किया, मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने खेतों में जाकर नुकसान का जायजा भी लिया और किसानों को सहायता देने की घोषणा की। इसके बावजूद घोषित सहायता की राशि को लेकर किसानों में असंतोष है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार की प्राथमिकता किसानों को वास्तविक राहत देना है या दिवाली से पहले सहायता की घोषणा करके राजनीतिक संदेश देना? सूखे से प्रभावित किसान को केवल त्योहार तक सीमित राहत नहीं, बल्कि नुकसान के आकलन के आधार पर पर्याप्त आर्थिक सहायता, कृषि लागत से राहत और संकट से उबरने के लिए ठोस उपाय चाहिए। गोरेगांव में किसानों का विरोध फडणवीस सरकार के लिए स्पष्ट चेतावनी है कि खेती की बर्बादी के बीच पांच हजार रुपये की घोषणा से किसानों की नाराजगी शांत होना आसान नहीं है। किसानों को आश्वासन नहीं, उनके नुकसान के अनुरूप मदद चाहिए।

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