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डॉक्टर्स डायरी : हीमोफीलिया के लक्षणों को न करें नजरअंदाज…समय पर जांच इलाज नहीं, जीवनदान है

डॉ. शैलेंद्र बनसोडे

हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं, लेकिन यह काफी गंभीर हो सकती है। इसमें शरीर में कुछ थक्के बनानेवाले कारकों की कमी के कारण खून सही तरीके से जम नहीं पाता, जिससे अगर चोट लग जाए तो सामान्य से ज्यादा खून बह सकता है। कई बार तो बिना किसी बड़ी चोट के भी अंदरूनी ब्लीडिंग होने लगती है, जो धीरे-धीरे खतरनाक रूप ले सकती है, इसलिए इसके लक्षणों को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है।
विश्व हीमोफीलिया दिवस हर साल १७ अप्रैल को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य हीमोफीलिया और अन्य वंशानुगत रक्तस्राव विकारों के बारे में दुनियाभर के लोगों में जागरूकता पैâलाना है। इस तिथि को प्रैंâक श्नाबेल के जन्मदिन के सम्मान में चुना गया था, जिन्होंने वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ हीमोफिलिया की स्थापना की थी। अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर थोड़ा ज्यादा खून बह गया तो इसमें खास बात क्या है, लेकिन हीमोफीलिया के मामले में यही एक बड़ी समस्या बन सकता है। खासकर बच्चों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। जब बच्चा रेंगना या चलना शुरू करता है, तब उसके शरीर पर बार-बार नीले निशान दिखने लगते हैं। कई बार ये निशान बिना किसी स्पष्ट चोट के भी आ जाते हैं। यही शुरुआती संकेत हो सकते हैं, जिन्हें नजरंदाज नहीं करना चाहिए।
अगर किसी छोटे कट या चोट के बाद खून काफी देर तक बहता रहे और जल्दी बंद न हो तो यह भी एक चेतावनी हो सकती है। इसी तरह, इंजेक्शन लगने या टीका लगने के बाद लंबे समय तक खून निकलना भी सामान्य नहीं है। कई बच्चों में नाक से बार-बार खून आना या मसूड़ों से खून बहना भी देखा जाता है। आमतौर पर लोग इसे हल्के में लेते हैं, लेकिन बार-बार ऐसा होना हीमोफीलिया का संकेत हो सकता है। एक और अहम लक्षण है जोड़ों में दर्द और सूजन। कई बार बच्चे या बड़े बिना किसी चोट के ही घुटनों, कोहनियों या टखनों में दर्द की शिकायत करते हैं। यह दर्द अंदरूनी रक्तस्राव की वजह से हो सकता है। अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए तो जोड़ों को स्थायी नुकसान भी हो सकता है और चलने-फिरने में दिक्कत आने लगती है। कुछ मामलों में पेशाब या मल में खून आना भी देखा जाता है, जो शरीर के अंदर हो रही ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। इसके अलावा अगर किसी सर्जरी या दांत निकलवाने के बाद खून ज्यादा समय तक बहता रहे, तो यह भी हीमोफीलिया की ओर इशारा कर सकता है। हीमोफीलिया एक गंभीर आनुवंशिक विकार है, जिसमें शरीर में ‘क्लॉटिंग पैâक्टर’ की कमी के कारण रक्त का थक्का नहीं बन पाता।
आज के समय में सही चिकित्सा और क्लॉटिंग पैâक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी की मदद से हीमोफीलिया से पीड़ित व्यक्ति भी सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकता है। सतर्कता ही इसका सबसे बड़ा बचाव है। यदि आपको या आपके बच्चे में ऊपर दिए गए लक्षण दिखें तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें। याद रखें, समय पर की गई जांच सिर्फ इलाज नहीं, जीवनदान है।
प्रमुख लक्षण जिन्हें न करें नजरअंदाज
हीमोफीलिया के संकेत अक्सर बचपन से ही दिखने लगते हैं
अत्यधिक रक्तस्राव: छोटी-सी चोट या कट लगने पर खून का लंबे समय तक न रुकना।
नीले निशान: बिना किसी स्पष्ट चोट के शरीर पर बार-बार नीले या काले निशान पड़ना।
जोड़ों में समस्या: घुटनों, कोहनियों या टखनों में बिना कारण सूजन और असहनीय दर्द होना, जो अंदरूनी ब्लीडिंग का संकेत है।
अन्य संकेत: नाक से अचानक खून बहना, मसूड़ों से रक्तस्राव या मल-मूत्र में खून आना।
जांच और उपचार क्यों है जरूरी?
हीमोफीलिया मुख्यत: वंशानुगत होता है। यदि परिवार में इसका इतिहास रहा हो तो बच्चों की विशेष जांच अनिवार्य है। एक साधारण ब्लड टेस्ट के जरिए क्लॉटिंग पैâक्टर के स्तर का पता लगाया जा सकता है।
महत्वपूर्ण: यदि जोड़ों के अंदरूनी रक्तस्राव का समय पर इलाज न हो तो यह स्थायी विकलांगता का कारण बन सकता है।

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