– नेपाली लड़कियों से शादी कराके तराई में बसा रहा है अड्डा
– भारतीय सीमा के अंदर की खुफिया जानकारी कर रहा इकट्ठा
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
कुछ वर्षों में भारत से सटे नेपाल के तराई क्षेत्र में चीन का हस्तक्षेप प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर बढ़ने लगा है। जानकार इसे भारत के सीमावर्ती क्षेत्र में चीन की ओर से नजर रखने की कवायद मान रहे हैं। दूसरे शब्दों में यहां चीन की ओर से जासूसी की जा रही है। नेपाल के रास्ते भारत में चीन की ओर से जासूसी के कई तरीके अपनाए जा रहे हैं।
सीमा क्षेत्र में घूमने के बहाने सीमा क्षेत्र की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की जा रही है। दर्जनों चीन के नागरिकों ने तो भारत से सटे नेपाल तराई क्षेत्र में नेपाली युवती के साथ शादी तक रचा डाली है। इतना ही नहीं, चीन के नागरिकों की ओर से कारोबार भी किया जाने लगा है। विराटनगर में चीन के नागरिक की ओर से संचालित दुकानों में तो चीनी नागरिक फर्राटेदार नेपाली से लेकर हिंदी और मैथिली तक बोलने लगे हैं। चीन दूतावास की ओर से नेपाल में प्राय: हिमालयन क्षेत्र या पहाड़ पर कार्यक्रम आयोजित किया जाता रहा है। लेकिन बीते आठ महीने से नेपाल की तराई क्षेत्र में चीन दूतावास के सहयोग से दर्जनों कार्यक्रम किए गए। नेपाल-चीन कूटनीतिक संबंध के ७०वीं वार्षिकोत्सव को लेकर मधेश प्रदेश से विभिन्न परियोजनाएं चल रही है।
नेपाली नहीं आती
जोगबनी सीमा से सटे नेपाल के रानी के सीमाई इलाके में घूम-घूम कर चीन की महिलाओं का समूह सौंदर्य सामग्री बेचता है। कई चीनी महिलाओं को नेपाली समझ में भी नहीं आती। ऐसे में वे प्ले कार्ड के माध्यम से ग्राहकों को कीमत बताती हैं।
भारत विरोधी एक्ट
सीमा पार भारत-नेपाल मामलों के जानकार राजेश कुमार शर्मा बताते हैं कि चीन का नेपाल में बड़े प्रोजेक्टों के साथ-साथ इन दिनों छोटे- छोटे मामलों में निवेश से नेपाल में एक वर्ग चीन के साथ खड़ा होने लगा है। ये वर्ग भारत विरोधी एक्ट को हवा देने का भी काम करता है।
मधेशियों पर नजर
शर्मा बताते हैं कि दरअसल, नेपाल के तराई क्षेत्रों में रहने वाले मधेशी मूल रूप से भारतीय रहे हैं। आज भी आपस में दोनों देशों के बीच विवाह होते हैं। ऐसे में चीन की नजर नेपाल के मधेश प्रदेश के साथ तराई इलाकों और वहां रहने वाले मधेशियों पर भी टिकी है।
