मुख्यपृष्ठसंपादकीयसंपादकीय :  लाड़ली बहनों के साथ धोखा...इनकी संपत्ति जब्त करो!

संपादकीय :  लाड़ली बहनों के साथ धोखा…इनकी संपत्ति जब्त करो!

जैसे प्रधानमंत्री मोदी, वैसे ही महाराष्ट्र में उनके चेले-चपाटे। यानी ‘जैसा बाप, वैसा बेटा, रोज कर रहा है लफ्फाजी’। महाराष्ट्र का विधानसभा चुनाव फडणवीस-मिंधे (शिंदे)-अजीत पवार की तिकड़ी ने हेर-फेर करके जीता है, यह बात अब किसी से छिपी नहीं है। ठीक चुनाव के वक्त इन तीन ‘भाइयों’ ने ‘लाड़ली बहन योजना’ पेश की। राज्य सरकार ने २.३८ करोड़ महिलाओं को हर महीने १,५०० रुपए देने का एलान किया। महिलाओं के खातों में पैसे जमा होते ही इन लाड़ली बहनों के सम्मेलन होने लगे और वहां ‘भैया-भैया’ के नारे गूंजने लगे। फडणवीस-मिंधे-अजीत पवार के बीच तो बहनों के सम्मेलन आयोजित करने की होड़ ही लग गई थी। इस योजना की वजह से पहले से ही कर्ज में डूबे महाराष्ट्र के खजाने पर हजारों करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा। इसके बावजूद चुनाव प्रचार में ये तीनों भाई सीना ठोककर कह रहे थे, ‘लाड़ली बहनों को किसी चीज की कमी नहीं होने दी जाएगी।’ बात यहीं नहीं रुकी, उन्होंने आगे कहा, ‘बहनों, १,५०० रुपए में आपका क्या होगा? सत्ता दोबारा हमारे हाथ में सौंपो, हम इस रकम को बढ़ाकर २,१०० से २,५०० रुपए कर देंगे। यह आपके लिए हमारी तरफ से शगुन है, यह भाईदूज का तोहफा है।’ लेकिन जैसे ही राज्य के सारे चुनाव खत्म हुए, थाली में परोसी गई यह सौगात वापस छीनने की तैयारी अब बचे हुए दो भाइयों ने शुरू कर दी है। इसके लिए ‘केवाईसी’ पूरा न होने का बहाना बनाकर करीब ८० लाख महिलाओं को अपात्र (अयोग्य) घोषित कर दिया गया। इसका सीधा मतलब यह है कि इन लोगों ने लाखों अपात्र महिलाओं के खातों में अंधाधुंध तरीके से सरकारी पैसा ट्रांसफर करके महिलाओं के वोट खरीदे और चुनाव जीत लिए। भ्रष्टाचार के इस पूरे खेल में हमारा चुनाव आयोग मूक-बधिर और अंधा बना रहा। महिलाओं ने हर महीने मिलने वाले १,५०० रुपए के बदले इस तिकड़ी को वोट दिया। नतीजतन, उनके वोटों का आंकड़ा करीब एक करोड़ से ‘सूज’ गया (बढ़ गया) और ये लोग इस भ्रष्ट तरीके से सत्ता में आ गए। लेकिन अब ‘लाड़ली बहन’ योजना के लाभार्थियों की अयोग्यता का भंडाफोड़ हो चुका है। सरकार पिछले डेढ़ साल से इन
अपात्र लाभार्थियों को पैसे
बांट रही थी। दिसंबर २०२४ तक करीब १७ हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम इस तरह बांट दी गई। यह पैसा सत्ता में बैठी इस तिकड़ी की जेब का नहीं था। अगर पैसों का यह बंटवारा गैरकानूनी है, तो सरकार को इसकी वसूली तो करनी ही होगी। इसलिए हमारा यह मानना है
 यह वसूली अपात्र महिलाओं के पर्स से नहीं की जानी चाहिए, बल्कि जिन्होंने इस पैसे की बर्बादी और हेर-फेर की है, उनसे एक-एक पाई वसूल की जानी चाहिए। इसके लिए एक मुख्यमंत्री और दो उप मुख्यमंत्रियों की इस तिकड़ी की चल-अचल संपत्ति को जब्त करना बेहद जरूरी है।
 जिस सरकारी तंत्र ने बिना किसी जांच-पड़ताल के अपात्र महिलाओं को हजारों करोड़ रुपए बांट दिए, उस सरकारी तंत्र पर भ्रष्टाचार के मुकदमे दर्ज कर जिम्मेदार अधिकारियों को बर्खास्त किया जाना चाहिए, खासकर संबंधित विभाग के तत्कालीन सचिव को।
 इस तिकड़ी ने खुद कबूल किया है कि महिलाओं को ‘लाड़ली बहन योजना’ का लाभ देने की वजह से महिलाओं ने झोली भरकर वोट दिए। अब जब महिलाओं को किया गया यह भुगतान भ्रष्ट और गैरकानूनी ठहराया जा चुका है तो यह भी साबित है कि गलत तरीके से लाखों महिलाओं को सरकारी पैसा बांटा गया। साथ ही, इन्हीं महिलाओं ने मौजूदा सत्ताधारी ‘तिकड़ी’ को वोट दिया। इसलिए चुनाव आयोग को ऐसी महिलाओं के मतदान को अवैध घोषित करना चाहिए और महाराष्ट्र में नए सिरे से चुनाव कराने का एलान करना चाहिए।
– ‘लाड़ली बहन योजना’ और ‘कौशल विकास योजना’ के लाभार्थियों का यह मामला अब तक का सबसे बड़ा घोटाला है। ऐसी योजनाओं में हुए घपले की जांच हाई कोर्ट के मौजूदा जज से कराई जानी चाहिए।
बेशक, राज्य के सत्ताधारी ऐसी कोई कार्रवाई करेंगे या होने देंगे, इसकी उम्मीद रत्तीभर भी नहीं है। क्योंकि आज जो ‘केवाईसी’ का बहाना ये लोग बना रहे हैं, वह प्रक्रिया उन्हें योजना लागू करने से पहले ही पूरी कर लेनी चाहिए थी। लेकिन तब तो
चुनाव जीतना
था, इसलिए योजना को बिना सोचे-समझे थोप दिया गया। अब जब चुनाव नहीं है, तो उन्हें केवाईसी, ‘वैâग’ की ऑडिट और ‘वैâग’ की रिपोर्ट जैसी बातें याद आ रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी देशभर में कई ऐसी ही खोखली योजनाओं की घोषणाएं कीं, जो हकीकत में सिर्फ हवा के बुलबुले साबित हुर्इं। मोदी ने अपनी पब्लिसिटी के लिए सरकारी खजाने से ६ हजार करोड़ रुपए उड़ा दिए। इससे जनता को क्या फायदा हुआ? सरकारी पैसे का यह सीधे-सीधे गबन है और गबन करनेवालों की जगह जेल में होनी चाहिए। लेकिन चूंकि यह ‘मोदी युग’ है, इसलिए यहां सब कुछ उल्टा हो रहा है। जिन्हें जेल में होना चाहिए था, वे देश के चौकीदार बने बैठे हैं। वैसे तो प्रधानमंत्री मोदी खुद ऐसी ‘रेवड़ी’ योजनाओं की आलोचना करते थकते नहीं हैं। वे भाषण देते हैं कि किसी को कुछ भी मुफ्त में मत दो और आत्मनिर्भर समाज बनाओ। लेकिन मोदी के दौर में कुछ भी आत्मनिर्भर नहीं रहा, बल्कि देश विदेशी ताकतों के सामने घुटने टेककर खड़ा है। मोदी ने अब तक किसानों, महिलाओं, गरीबों और आदिवासियों के लिए जो योजनाएं घोषित की हैं, उनकी जमीनी हकीकत की जांच होनी जरूरी है। सियासी फायदे और चुनाव जीतने के लिए सरकारी खजाने की लूट-खसोट करना देशद्रोह है। और अगर इस देशद्रोह के लिए कोई तालियां बजा रहा है, तो उन्हें अपना दिमाग जांचने की जरूरत है। अगर ७० हजार करोड़ रुपए का सिंचाई घोटाला एक रात में धुलकर पाक-साफ हो जाता है और ‘लाड़ली बहन योजना’ का यह घपला भी मोदी को भ्रष्टाचार नहीं लगता, तो बेहतर होगा कि देश की सर्वोच्च अदालत और चुनाव आयोग को भंग कर दिया जाए और यह पूरी जिम्मेदारी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को ही सौंप देना उचित होगा। ‘लाड़ली बहन योजना’ के जरिए एक करोड़ महिलाओं के वोट सरकारी पैसे से खरीदकर महाराष्ट्र की सत्ता पर काबिज हुई यह मौजूदा सरकार एक वैश्विक घोटाला है। यह महाघोटाला करके उन्होंने महिलाओं और पूरे महाराष्ट्र के साथ सरासर धोखाधड़ी की है। इसके लिए उनकी संपत्ति जब्त होनी ही चाहिए। इस बेशर्म सरकार को धक्के मारकर सत्ता से बाहर फेंकने के अलावा अब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है!

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