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संपादकीय : ‘नए नागपुर’ के निमित्त…

राज्य सरकार ने नागपुर में एक ‘अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय केंद्र’ (आईबीएफसी) विकसित करने का पैâसला लिया है। सरकार का इरादा मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स की तर्ज पर एक ‘नया नागपुर’ बनाने का है। इसी के तहत यह नया अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय केंद्र बनाया जाएगा। यह भव्य केंद्र नागपुर के हिंगण स्थित गोधनी और लाडगांव में लगभग ६९० हेक्टेयर भूमि पर होगा। चूंकि मुख्यमंत्री फडणवीस नागपुर से हैं इसलिए कहा जा सकता है कि उन्होंने इस केंद्र के लिए नागपुर को प्राथमिकता दी। मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है। सभी प्रकार के वित्तीय संस्थान, उनके मुख्यालय, सेवा केंद्र, शेयर बाजार, सभी मुंबई में हैं। इसीलिए जब देश में एक अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) बनाने की बात आई, तो मुंबई को चुना गया। हालांकि, जब से देश में मोदी सरकार सत्ता में आई है, तब से मुंबई का महत्व, जो उनके और उनकी पार्टी को चुभ रहे मुंबई के महत्व को बार-बार
नजरअंदाज
किए जाने की कोशिश की जाती रही है। इसी के चलते मुंबई स्थित अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र के विकल्प के रूप में रिकॉर्ड समय में गुजरात में ‘गिफ्ट सिटी’ की स्थापना हुई। स्वाभाविक रूप से नागपुर में ‘अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एवं वित्तीय केंद्र’ (आईबीएफसी) स्थापित करने के विचार पर अलग-अलग तर्क-कुतर्क दिए जा सकते हैं। जब मुंबई में पहले से ही एक अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय केंद्र है, तो नागपुर में एक और केंद्र की खटपट क्यों? ऐसे सवाल पूछे जा सकते हैं। बेशक, इस पर सरकार का स्पष्टीकरण अलग है। मुख्यमंत्री का कहना है कि इसके पीछे कोई छिपा हुआ एजेंडा नहीं है, बल्कि विचार राज्य के संतुलित विकास का है। अगर उनका यह कथन सही भी है, तो उन्हें इस विचार को और व्यापक तौर पर आगे बढ़ाना चाहिए। अगर नागपुर में नया अंतर्राष्ट्रीय केंद्र विकास को गति देने वाला है, तो यह अच्छी बात है। बस मुख्यमंत्री को यहीं नहीं रुकना चाहिए। नागपुर उनका ‘होम टाउन’ है। इसलिए उन्होंने राज्य में दूसरे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एवं वित्तीय केंद्र के लिए नागपुर को भले ही चुना हो, लेकिन चाहे वह ‘नया नागपुर’ हो या उसमें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार केंद्र, अंतत: यह राज्य के
विकास को गति देने
में महत्वपूर्ण होगा। मुंबई के अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय केंद्र को गुजरात ले जाना, महाराष्ट्र में आनेवाली औद्योगिक परियोजनाओं को गुजरात ले जाना अलग बातें हैं और महाराष्ट्र की उप-राजधानी में वित्तीय केंद्र स्थापित करना अलग बात है। बेशक ‘नया नागपुर’ बनाएं, लेकिन राज्य के अन्य ‘मेट्रो’ शहरों के बारे में भी सोचें। क्योंकि आज इन सभी शहरों की हालत बेकाबू हो गई है। शहरी नियोजन की तो ऐसी की तैसी हो गई है। बढ़ती आबादी के चलते कम से कम बुनियादी सुविधाओं पर भारी दबाव पड़ रहा है। इसलिए सरकार को अन्य बड़े शहरों के नियोजित विकास के बारे में भी सोचना चाहिए। मुख्यमंत्री महोदय, नागपुर पर सभी का प्रेम है। चूंकि वह आपका ‘गांव’ है इसलिए आपका प्रेम थोड़ा अधिक होगा हम यह समझ लेते हैं, लेकिन यही प्रेम राज्य के अन्य छोटे-मोटे शहरों को भी मिलने दीजिए। ‘नए नागपुर’ की तरह, ‘नए पुणे’, ‘नए नासिक’, ‘नए कोल्हापुर’, ‘नए छत्रपति संभाजीनगर’ जैसे नए विकास रोडमैप को राज्य में लागू किया जा सकता है। तभी, जैसा आप कहते हैं, राज्य का संतुलित विकास हो सकता है। ‘नए नागपुर’ के निमित्त ऐसा हो, बस इतना ही।

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