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संपादकीय : लू का प्रकोप और मौतें!

इस साल की गर्मी ने सचमुच कहर बरपा दिया है। महाराष्ट्र सहित पूरे देश में पिछले दो महीनों से सूरज आग उगल रहा है। तापमान ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पिछले दो महीनों से लगातार लू (उष्णता की लहर) का प्रकोप बने रहने के कारण, अब तक ७० से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। विदर्भ और मराठवाड़ा पर सूरज का सबसे ज्यादा प्रकोप देखने को मिल रहा है। विदर्भ के नागपुर, चंद्रपुर, अमरावती, यवतमाल, वर्धा और मराठवाड़ा के हिंगोली, परभणी, नांदेड़, छत्रपति संभाजीनगर तथा उत्तर महाराष्ट्र के जलगांव और धुले जिले भीषण तापमान के कारण सचमुच झुलस गए हैं। आमतौर पर गर्मी के चार महीनों के दौरान हर साल करीब ८ से १५ दिन ही लू चलती है। अप्रैल से मई महीने के इन १५ दिनों में धूप से बचने के लिए सावधानी बरतनी पड़ती थी। लेकिन इस साल तो लू थमने का नाम ही नहीं ले रही है। अप्रैल और मई यानी लगातार दो महीनों, तकरीबन ६० दिनों से महाराष्ट्र की जनता इस भीषण लू का सामना कर रही है। इसके अलावा, अगले आठ-दस दिनों तक इस स्थिति में सुधार के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं, बल्कि आखिरी दौर में गर्मी और ज्यादा बढ़ती जा रही है। गर्मी के सबसे तपते हुए नौ दिन सोमवार से शुरू हो गए हैं, जिसे विदर्भ में ‘नवतपा’ कहा जाता है। नवतपा के पहले ही दिन विदर्भ में पारा ४७ डिग्री सेल्सियस को पार कर गया। चंद्रपुर जिले के ब्रह्मपुरी में देश का सबसे अधिक यानी ४७.६ डिग्री सेल्सियस
तापमान दर्ज
किया गया। पिछले हफ्ते ब्रह्मपुरी शहर लगातार दो दिनों तक देश का सबसे गर्म स्थान रहा। मई महीने के अंतिम सप्ताह में विदर्भ मानो भट्ठी में तब्दील हो चुका है। संपन्न परिवारों की बात अलग है, लेकिन सड़कों पर, पुलों के नीचे और फुटपाथों पर रहने वाले गरीबों तथा खेतों में कड़ी धूप में काम करनेवाले मजदूर किसानों का हाल बेहाल है। अमरावती में पिछले २४ घंटों में लू लगने (उष्माघात) के कारण सात लोगों की मौत हो गई। इनमें से ज्यादातर लोग बेघर और लावारिस थे। यवतमाल जिले में भी पिछले तीन दिनों में लू से ११ लोगों की जान चली गई। शनिवार को एक ही दिन में चार लोग लू की चपेट में आ गए। यवतमाल जिले के दिग्रस शहर में अलग-अलग तीन जगहों पर सड़कों पर शव मिले, जिन्हें लू का शिकार माना जा रहा है। नागपुर में हर दिन औसतन तीन बेकसूर लोग लू के कारण दम तोड़ रहे हैं। पिछले आठ दिनों में सड़कों पर २६ अज्ञात लोगों की मौत हुई है। नागपुर जिले के सावनेर में भी लू से दो लोगों की मौत हो गई। चंद्रपुर जिले के भद्रावती तालुका में लू ने दो लोगों की जान ले ली। मराठवाड़ा के हिंगोली जिले के सेनगांव में लू से एक ४८ वर्षीय व्यक्ति की, जबकि उत्तर महाराष्ट्र के जलगांव जिले में एक सेंट्रिग मजदूर सहित चार लोगों की मौत हो गई। पुणे जिले को आमतौर पर राज्य के
अन्य हिस्सों की तुलना में
कम तापमान वाला इलाका माना जाता है, लेकिन इस साल पुणे में भी तापमान ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। पुणे शहर और जिले में दो लोगों की लू लगने से मौत हो गई। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले दो दिनों तक यानी २८ मई तक तीव्र लू का यह दौर जारी रहेगा। इसलिए लू का खतरा अभी टला नहीं है। दुनिया के सबसे गर्म ५० शहरों की सूची में शामिल सभी ५० शहर भारत के ही हैं, जिनमें से आधे से अधिक शहर अकेले उत्तर प्रदेश के हैं। महाराष्ट्र का चंद्रपुर शहर भी इस सूची में शामिल है। इसके अलावा छत्तीसगढ़, बिहार, तेलंगाना, हरियाणा और मध्य प्रदेश के कई शहर भी इस फेहरिस्त में हैं। महाराष्ट्र के साथ-साथ तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में भी लू के कारण ७० से अधिक लोगों की मौत हुई है। लू ने इस साल पूरे देश में हाहाकार मचा रखा है। पिछले दो महीनों से महाराष्ट्र सहित देश के कई हिस्सों में सूरज का प्रकोप जारी है। लू के कारण पूरे देश में १५० से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से करीब आधे पीड़ित अकेले महाराष्ट्र के हैं। केवल नागपुर, अमरावती, यवतमाल और चंद्रपुर जिलों में ही ५० से अधिक लोग लू के कारण अपनी जान गवां चुके हैं। विदर्भ, मराठवाड़ा और उत्तर महाराष्ट्र को झुलसाने वाली यह लू अगले दो दिनों तक बनी रहेगी, ऐसा अनुमान मौसम विभाग ने जताया है। ऐसा लगता है कि मानसून के आने तक महाराष्ट्र की यह तपन और लू का खतरा यूं ही बना रहेगा!

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