मौसम कोई भी हो, महाराष्ट्र के प्याज (कांदा) उत्पादकों की आंखों में पानी न आए, ऐसा होता ही नहीं है। कभी बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की मार उनके मुंह तक आया निवाला छीन लेती है। कभी फसल अच्छी हो जाए तो सरकार की नाकामी के कारण उन्हें प्याज कौड़ियों के दाम बेचना पड़ता है या सड़कों पर फेंक देना पड़ता है। अब भी राज्य के किसानों पर वही वक्त आया है। प्याज का उत्पादन अच्छा हुआ होने के बावजूद प्याज के दाम लगातार गिर रहे हैं। प्याज को वर्तमान में मिलनेवाला भाव उत्पादन लागत भी नहीं निकाल सकता, इतना कम है और सरकार हमेशा की तरह सुस्त निष्क्रिय है। इसलिए बड़ी मेहनत से उगाया गया प्याज किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हुआ है। राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सातारा के एक कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में प्याज खरीद के लिए बड़ा दिखावा करते हुए १,२३५ रुपए प्रति क्विंटल का भाव घोषित किया। परंतु उससे मुनाफा तो दूर, उत्पादन लागत भी नहीं निकल रही है इसलिए यह भाव यानी किसानों का मजाक ही साबित हुआ है। उसमें बेमौसम बारिश और भीषण गर्मी का भी विपरीत असर प्याज की फसल पर पड़ा है। इन सबका विचार करके सरकार को प्याज
खरीद की दर
तय करनी चाहिए थी। लेकिन सरकार ने दस साल पुराना भाव किसानों के मत्थे मढ़ दिया है। उसमें अब सरकार ने दूसरी बार र्इंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की है इसलिए प्याज परिवहन के खर्च में वृद्धि होनेवाली है। खाड़ी युद्ध के कारण प्याज का निर्यात कम हुआ है। नतीजतन, प्याज की घरेलू आवक बढ़ गई है और इतनी बड़ी मात्रा में प्याज के स्टॉक की क्षमता सरकारी तंत्र के पास नहीं है। इस पूरी स्थिति का परिणाम प्याज के दामों में लगातार गिरावट के रूप में हुआ है। इस गिरावट पर लगाम लगाने के बजाय सत्ताधारियों ने किसानों पर प्रति किलो केवल एक रुपया के भाव से प्याज बेचने की नौबत ला दी है। इसके विरोध में मराठवाड़ा के एक किसान सुधाकर सुलताने ने एक पत्र, एक रुपया और एक प्याज मुख्यमंत्री को भेजा, लेकिन इस सरकार पर रत्तीभर भी असर नहीं हुआ। तीन साल पहले उप मुख्यमंत्री रहते हुए फडणवीस ने २,४१० रुपए प्रति क्विंटल भाव देने का आश्वासन दिया था। उनका वह आश्वासन अब किस हवा में विलीन हो गया है? १,२३५ रुपए प्रति क्विंटल के ही भाव पर फडणवीस क्यों अड़े हुए हैं? बाजार समितियों में प्याज के दाम गिरे होने पर ‘नाफेड’ के माध्यम से प्याज खरीदने के लिए वे
किस मुहूर्त का
इंतजार कर रहे हैं? प्याज को प्रति क्विंटल कम से कम २,००० रुपए और प्याज भंडार गृह के निर्माण के लिए ७५ प्रतिशत अनुदान देने की विपक्ष की जायज मांगों की अनदेखी क्यों की जा रही है? प्याज को १,२३५ रुपए प्रति क्विंटल का भाव देना यानी सामान्य प्याज उत्पादक किसानों के जख्मों पर सत्ताधारियों द्वारा नमक छिड़कने जैसा है। राज्य में अब कोई चुनाव न होने के कारण प्याज उत्पादकों की आंखों के आंसू पोंछने की जरूरत सत्ताधारियों को महसूस नहीं हो रही होगी। जो सत्ताधारी पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ के लिए र्इंधन की मूल्य वृद्धि को रोककर रखते हैं और चुनाव खत्म होते ही इस घाटे का बोझ देश की जनता पर डालकर मुक्त हो जाते हैं, वे शासक प्याज को उचित भाव देकर सामान्य प्याज उत्पादकों का नुकसान पूरा करेंगे, इसकी कोई संभावना ही नहीं है। प्याज का भंडारण करें तो वह सड़ता है और बेचें तो मिट्टी के मोल भाव मिलता है, ऐसी आज महाराष्ट्र के प्याज उत्पादकों की स्थिति इस सरकार के कारण हो गई है। उनकी आंखों में आज आप आंसू लाए हैं। उन्हें पोंछने की जहमत भी आप नहीं उठा रहे हैं। कल यही प्याज उत्पादक आपकी आंखों से पानी लाए बिना नहीं रहेगा, इतना याद रखिए!
