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मीरा-भायंदर मनपा का ‘अवैध’ बाजार!..सोसायटी के आरजी क्षेत्र पर प्रशासन का ‘कब्जा’

सामना संवाददाता / मीरा रोड

एक ओर जहां सरकार ‘ओपन स्पेस’ और ‘गार्डन’ को संरक्षित करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर मीरा-भायंदर मनपा पर एक हाउसिंग सोसायटी के रिक्रिएशनल ग्राउंड यानी मनोरंजन मैदान को अवैध रूप से हड़पने और उस पर व्यावसायिक सब्जी बाजार चलाने का गंभीर आरोप लगा है।
यह है मामला
जेसल पार्क, भायंदर-पूर्व आशानगर स्थित सोसायटी का आरोप है कि साल २०१९ में मीरा-भायंदर मनपा ने सोसायटी के निवासियों की सहमति के बिना उनके ४७१.०१ वर्ग मीटर के आरजी क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। नियमों के मुताबिक, आरजी क्षेत्र केवल सोसायटी के निवासियों और बच्चों के उपयोग के लिए होता है, लेकिन प्रशासन ने इसे ‘वेजिटेबल मार्वेâट’ में तब्दील कर दिया। दस्तावेजों से यह चौंकानेवाला तथ्य सामने आया है कि नगर रचना विभाग ने वर्ष २०२४ में सोसायटी को ‘ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट’ जारी किया, जिसमें उस जमीन को स्पष्ट रूप से मनोरंजन मैदान दिखाया गया है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि जमीन पर पहले से ही मीरा-भायंदर नगर निगम का बाजार चल रहा था, तो ओसी प्लान में उसे ‘सब्जी बाजार’ के रूप में क्यों नहीं दिखाया गया? क्या टाउन प्लानिंग विभाग ने जानबूझकर तथ्यों को छुपाकर गलत ओसी जारी किया? आज जब सोसायटी अपना हक मांग रही है तो कार्यकारी अभियंता (सा.बां.) दीपक खांबित सोसायटी से मालिकाना हक के दस्तावेज मांग रहे हैं। सवाल यह है कि २०१९ में बाजार बनाते समय उन्होंने ये दस्तावेज क्यों नहीं जांचे?
सामाजिक कार्यकर्ता का तीखा प्रहार
इस मुद्दे पर मुखर होकर आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता रंजीत झा ने तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। ‘साल २०१९ में तत्कालीन विधायक नरेंद्र मेहता और महापौर डिंपल मेहता ने बड़े ताम-झाम के साथ इस सब्जी बाजार का उद्घाटन किया था। लेकिन क्या उन्होंने जनता को यह बताया कि यह बाजार एक निजी सोसायटी के बच्चों का मैदान छीनकर बनाया गया है? मनपा आज सोसायटी से कागजात मांग रही है, लेकिन जब अवैध तरीके से इस बाजार का निर्माण हो रहा था, तब उनकी नैतिकता और नियम कहां गए थे? बिना सहमति और बिना कानूनी प्रक्रिया के किसी की जमीन पर कब्जा कर उससे ‘टेंडर’ के जरिए राजस्व कमाना न केवल अवैध है, बल्कि यह प्रशासन की नैतिक गिरावट का प्रमाण है।’
सोसायटी की मांग
सोसायटी ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन तुरंत इस अवैध अतिक्रमण को हटाए और उनके बच्चों के खेलने की जगह उन्हें वापस लौटाए। सोसायटी का तर्क है कि यूडीसीपीआर और महाराष्ट्र ओनरशिप फ्लैट्स एक्ट के तहत आरजी क्षेत्र का उपयोग किसी भी व्यावसायिक गतिविधि के लिए नहीं किया जा सकता।

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