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संपादकीय : शाबाश, कैप्टन मच्छार!

वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ प्रस्ताव और भाषणों की बौछार की जा रही हो, तब भी आतंकवाद तरह-तरह के रूपों में सामने आता रहता है। दुबई से इजरायल जा रहे ‘फ्लाईदुबई’ के हवाई जहाज को इजराइल में ही टकराकर ‘आत्मघाती’ तरीके से हमला करने की साजिश भारतीय पायलट स्मित मच्छार की वजह से नाकाम हो गई। कैप्टन मच्छार के साहस की बदौलत १७४ पैसेंजर्स की जान बच गई, जिस पर प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति ट्रंप, इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू वगैरह ने कैप्टन मच्छार को बधाई दी। उन्हें ‘रियल हीरो’ के रूप में सराहा। शुक्रवार को मोदी ने अस्पताल में भर्ती कैप्टन मच्छार से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की और सभी चैनलों पर उसका ‘लाइव’ प्रसारण किया गया। वह अपेक्षित ही था। कैप्टन मच्छार निश्चित रूप से अब पूरे भारतीयों के ‘नायक’ बन चुके हैं। उन्होंने शौर्य और मुस्तैदी नहीं दिखाई होती तो ‘तेल अवीव’ में बहुत बड़े हादसे को अंजाम देकर दुनिया को दहलाने की चाल कामयाब हो जाती। अब क्या होगा? अब बीजेपी की परंपरा के मुताबिक इस वीर पुरुष को कब्जे में लेकर बीजेपी का ‘ब्रांड एंबेसडर’ बनाने का प्रयोग होगा और मोदी से प्रेरणा लेकर वैâप्टन मच्छार ने हवाई जहाज में शौर्य दिखाया, ऐसा प्रचार शुरू हो जाएगा। कैप्टन मच्छार ने जान की बाजी लगाकर आतंकवादी हमला नाकाम न किया होता तो हवा में एक और ‘९/११’ की पुनरावृति हो सकती थी।
दुबई से तेल अवीव की ओर
रवाना हुए ‘फ्लाईदुबई’ के ‘FZ १०७३’ इस बोइंग ७३७ मैक्स हवाई जहाज में करीब ३५ हजार फीट की ऊंचाई पर ओमानी मूल के को-पायलट ने कैप्टन मच्छार पर चाकू से वार किया और हवाई जहाज को क्रैश करने की कोशिश की। इस हाथापाई में हवाई जहाज कुछ ही सेकंडों में १४ हजार फीट नीचे आ गया, लेकिन कॉकपिट में खून से लथपथ पड़े कैप्टन मच्छार ने उस हालत में भी कॉकपिट का दरवाजा खोलकर इमरजेंसी का संकेत दिया। पैसेंजर और बाकी क्रू मेंबर्स के अंदर आने तक उन्होंने हवाई जहाज से अपना नियंत्रण नहीं खोया। आखिरकार, सऊदी अरब के तबूक में कैप्टन मच्छार ने हवाई जहाज की सुरक्षित लैंडिंग कराकर १७४ पैसेंजर्स की जान बचा ली। इसमें छोटे बच्चे भी शामिल थे। हवाई जहाज के ज्यादातर पैसेंजर इजरायली रहे होंगे और इस हरकत के पीछे इजरायल की युद्धग्रस्त नीतियों के खिलाफ गुस्सा रहा होगा। इजरायल ने गाजा पट्टी पर लाखों बम गिराकर हजारों माताओं, नवजातों और छोटे बच्चों को मौत के घाट उतारा है। यह हरकत अमानवीय है। हालांकि, उन्हीं इजरायली मूल के छोटे बच्चों की जान एक भारतीय पायलट ने बचाई। घायल हालत में भी कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोलकर पैसेंजर्स को सावधान करने की मुस्तैदी दिखाई। यह सब लंबे अनुभव से ही सूझता है। कैप्टन मच्छार के इस साहसी फैसले से क्या समझ आता है? यही कि विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान कितना भी उन्नत क्यों न हो गया हो, हवा में सुरक्षा अब भी इंसान के पैâसले पर ही टिकी है। अत्याधुनिक विमान में ऑटोमैटिक सिस्टम, सुरक्षा के साधन और
कड़े निरीक्षण
होने के बावजूद हवाई जहाज में धारदार चाकू पहुंच गया और उसी चाकू के बल पर कोशिश की गई। जिस एयरपोर्ट से यह को-पायलट सवार हुआ, वहां की सुरक्षा जांच से वह ‘चाकू’ उसके साथ हवाई जहाज में चला गया। इजरायल के साथ युद्ध में ओमान ईरान की मदद कर रहा है। ऐसे में इजरायल के रूट की उड़ानों के लिए ओमानी पायलट को इजाजत कैसे मिली? यह सवाल तो बना ही हुआ है। खैर, कैप्टन मच्छार के साहसी कदम से ‘फ्लाई दुबई’ के हवाई जहाज का होनेवाला अनर्थ टल गया और उसका ‘इवेंट’ बनाने का मौका मोदी को मिल गया। कैप्टन मच्छार के मुंबई स्थित रिश्तेदारों को ढूंढकर उन्हें मुख्यमंत्री के दफ्तर तक पहुंचाया गया। मानो ३५ हजार फीट की ऊंचाई पर १७४ लोगों की जान बचाने का श्रेय ‘बीजेपी’ का ही हो। कैप्टन स्मित मच्छार इस वक्त सिर्फ एक भारतीय हैं। उन्होंने भारतीय शौर्य का परचम लहराया है। ‘९/११’, ‘२६/११’ जैसे आतंकवादी हमलों और कंधार जैसे हवाई जहाज अपहरणों से दुनिया त्रस्त है और दुनिया से आतंकवाद खत्म हो, ऐसा हर कोई चाहता है। इसके बावजूद अलग-अलग तरीकों से दुनियाभर में आतंकवादी हमले जारी ही हैं। एक आतंकवादी हमले की साजिश को ३५ हजार फीट की ऊंचाई से नीचे गिरा दिया गया। कैप्टन मच्छार की जितनी तारीफ की जाए, कम ही है। एक भारतीय ने दुनिया को दिखा दिया कि आतंकवाद से जमीन पर भी और हवा में भी लड़ा जा सकता है। कैप्टन मच्छार की हिम्मत का दुनिया ने लोहा माना है!

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