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जनता के पैसों पर मनपा का ‘कचरा’ कारनामा!

-डिपो में सड़ रहीं लाखों की घंटागाड़ियां
-कागजों में अटका स्वच्छता अभियान!

सुरेश गोलानी / मुंबई

स्वच्छता अभियान का ढिंढोरा पीटने वाली मीरा-भायंदर महानगरपालिका का एक अजीब कारनामा सामने आया है। मनपा प्रशासन ने लाखों रुपए की १० नई घंटागाड़ियों (कचरा गाड़ियों) को घोड़बंदर बस डिपो में लावारिस छोड़ दिया है। शहर की सफाई व्यवस्था को सुधारने हेतु विधायक निधि के माध्यम से खरीदी गई ये सभी गाड़ियां पिछले कई महीनों से बिना किसी उपयोग के डिपो में खड़ी-खड़ी धूल खा रही हैं।
लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन्हें सड़कों पर उतारने के बजाय डिपो के एक कोने में सड़ने के लिए खड़ा कर दिया गया है। खुले आसमान के नीचे लंबे समय से खड़ी इन गाड़ियों के पिछले हिस्से में बारिश का पानी जमा हो चुका है, जिससे इनके लोहे के हिस्सों में अब तेजी से जंग लग रही है।
इस लापरवाही के पीछे का सबसे बड़ा कारण प्रशासनिक सुस्ती को माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इन गाड़ियों की अब तक आरटीओ में वाहन पंजीकरण, फिटनेस और बीमा जैसी बुनियादी कागजी प्रक्रियाएं ही पूरी नहीं की गई हैं। जब तक यह कागजी काम पूरा नहीं होता, इन्हें कानूनी रूप से सड़कों पर नहीं चलाया जा सकता। एक तरफ मीरा-भायंदर के कई इलाकों में नागरिक समय पर कचरा न उठने और गंदगी की गंभीर शिकायतें कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जनता के टैक्स के पैसों से खरीदी गई गाड़ियां कबाड़ में तब्दील हो रही हैं। स्थानीय नागरिकों में इस कुप्रबंधन को लेकर भारी आक्रोश है और उन्होंने मनपा प्रशासन से इस लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने तथा पूरी खरीद प्रक्रिया का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है।
कागजों में फंसी गाड़ियां
लाखों रुपए खर्च कर खरीदी गई १० घंटागाड़ियां महीनों से डिपो में खड़ी हैं। सूत्रों के अनुसार, आरटीओ पंजीकरण, फिटनेस और बीमा जैसी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं होने से इनका संचालन शुरू नहीं हो सका है। कागजी प्रक्रिया में देरी के कारण नई गाड़ियां खुले में खड़ी-खड़ी जंग खा रही हैं।

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