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रुपया ९६ के पार, जेब पर महंगाई की आहट

-तेल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के दबाव में रुपया दो महीने के निचले स्तर पर; आयात, विदेश शिक्षा और यात्रा हो सकती है महंगी

सामना संवाददाता / मुंबई

भारतीय रुपया गुरुवार को ०.५ प्रतिशत टूटकर ९६.३१५० प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो करीब दो महीने का सबसे निचला स्तर है। अमेरिकी १०-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड ५.३४ प्रतिशत तक पहुंचने और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने रुपये पर दबाव बढ़ाया। शुक्रवार को गांधी जयंती के कारण घरेलू मुद्रा बाजार बंद रहे।
कमजोर रुपया केवल करेंसी बाजार की खबर नहीं है। भारत कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और कई जरूरी वस्तुओं का बड़ा हिस्सा आयात करता है। डॉलर महंगा होने पर इनका आयात बिल बढ़ सकता है और यही बढ़ी हुई लागत आगे चलकर उपभोक्ता कीमतों तक पहुंच सकती है।
विदेश में पढ़ाई और यात्रा पर सीधा असर
विदेश में पढ़ने वाले छात्रों, विदेश यात्रा करने वालों और डॉलर में भुगतान करने वाले कारोबारियों पर इसका असर अधिक सीधा पड़ेगा। दूसरी तरफ, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजारों से पैसा निकालकर डॉलर परिसंपत्तियों की ओर खींच सकती है। अगर तेल महंगा और रुपया कमजोर, दोनों बने रहे, तो आयातित महंगाई की अगली चोट कितनी जल्दी आम आदमी तक पहुंचेगी?

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