सामना संवाददाता / मुंबई
वोट चोरी का विषय हम नहीं छोड़ने वाले हैं। हमने चुनाव आयुक्त को पत्र दिया है कि इतना सारा गड़बड़-घोटाला उजागर होने के बाद राज्य चुनाव आयोग जब तक मतदाताओं की संशोधित सूची तैयार नहीं करता, तब तक निकाय चुनाव नहीं होने चाहिए। यह हमारी स्पष्ट मांग है। हम यह नहीं कह रहे कि चुनाव न कराएं, लेकिन चुनाव कराते समय त्रुटिपूर्ण मतदाता सूची पर यह इलेक्शन नहीं होना चाहिए। यह चुनाव आयोग की भ्रष्ट प्रैक्टिस है और वे किसकी नौकरी कर रहे हैं, यह अब धीरे-धीरे उजागर हो रहा है। इन शब्दों में शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने जोरदार प्रहार किया। इसके साथ ही उन्होंने सवालों के तोप दागते हुए कहा कि यह सरकार जेन-जी से क्यों डरती है? एक जुलाई के बाद जिन्हें मतदान का अधिकार मिलना चाहिए था, वे महाराष्ट्र के युवा मतदान क्यों नहीं कर सकेंगे? मातोश्री निवास स्थान पर मीडिया से बातचीत में उद्धव ठाकरे ने उक्त बातें कहीं।
जो सो गया, वह खत्म हो गया
वोट चोरी एक मुद्दा है। परसों विशाल मोर्चा निकला। संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के बाद पहली बार लगभग सभी राजनीतिक दल महाराष्ट्र में एकजुट हुए और उन्होंने सरकार या चुनाव आयोग से जवाब मांगा। उस भाषण में मैंने कहा था कि हम शाखाओं से मतदाता पहचान केंद्र शुरू कर रहे हैं। इसकी शुरुआत अब होगी, क्योंकि दस तारीख को वह सूची प्रकाशित होगी और उसके बाद वाले सप्ताह में आपत्तियां और कुछ सुझाव स्वीकार किए जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अब यही समय है, क्योंकि इस वक्त जो सो गया, वह खत्म हो गया।
शाह के गले के नीचे नहीं उतरता निवाला!
शाह एंड कंपनी को लगता है कि शिवसेना खत्म हो गई है, लेकिन शिवसेना कभी खत्म नहीं होने वाली है। शाह को उद्धव ठाकरे और शिवसेना का नाम लिए बिना निवाला गले के नीचे नहीं उतरता है। उन्हें महाराष्ट्र निगलना है, इसलिए वे शिवसेना को खत्म करना चाहते थे। असली एनाकोंडा सब कुछ निगल जाना चाहता है। उस एनाकोंडा का विरोध सिर्फ शिवसेना करती है इसलिए उसे शिवसेना पसंद नहीं है। इन शब्दों में शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है।
मातोश्री निवास स्थान पर पक्ष प्रवेश के बाद आए कार्यकर्ताओं से संवाद साधते हुए उन्होंने सत्ताधारियों पर तीखा प्रहार किया। इसके बाद मीडिया से बातचीत में किसान कर्जमाफी के मुद्दे पर सरकार की खबर ली। उन्होंने कहा कि खरीफ का मौसम बीत गया। सरकार ने एक पैकेज घोषित किया। उसके बाद हमने छत्रपति संभाजीनगर में मोर्चा निकाला था। आज भी किसानों की कर्जमुक्ति की मांग हो रही है। मूसलाधार बारिश के बाद आज या कल केंद्र का निरीक्षण दल आनेवाला है। इस निरीक्षण दल का दौरा केवल दो-तीन दिनों का है। दो-तीन दिनों में इतने बड़े मराठवाड़ा और पूरे महाराष्ट्र का दौरा यह केंद्रीय दल वैâसे करेगा? कहां-कहां ठीक-ठीक जाएगा? उसके बाद जब उन्हें नुकसान का आकलन होगा तो वे प्रस्ताव कब भेजेंगे? उद्धव ठाकरे ने महायुति सरकार की खबर लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने मुख्यमंत्री से कहा था कि आप प्रस्ताव भेजिए। मुझे नहीं लगता कि अब तक राज्य सरकार की ओर से कोई भी प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है।
वोट चोरी और मतदाता सूची में गड़बड़ियों पर उद्धव ठाकरे ने आगे कहा कि मेरे पास मतदाता सूची के वेरिफिकेशन के लिए चुनाव आयोग के लोग आए थे। आयोग के लोग मेरे पास आए वैâसे? इसका कारण यह है कि किसी ने एक नंबर से मेरे नाम पर वहां आवेदन करने का प्रयास किया। उस नंबर पर अगर ओटीपी आया होता तो आगे सब कुछ हैक हो जाता और शायद मेरे परिवार सहित चार नाम हटा दिए जाते। इसके पीछे वास्तव में कौन है? किसकी साजिश है? इसकी एक पक्की जांच होनी चाहिए। इसी वजह से सभी विपक्षी दल एकजुट हुए हैं और हम अपनी शाखाओं से मतदाताओं की सुविधा के लिए ये केंद्र खोल रहे हैं। उद्धव ठाकरे ने आह्वान करते हुए कहा कि मतदाता यह जांच लें कि उन्हें वोटिंग का अधिकार है या नहीं? सूची में नाम है या नहीं? यह हमारी शाखाओं के बने केंद्रों में आकर जांचें और अगर कोई गड़बड़ी है तो उसे समय रहते सुधार सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुझे संदेह है कि सक्षम नामक ऐप और सर्वर दोनों ही चुनाव आयोग द्वारा नियंत्रित नहीं किया जा रहा है। अगर नाम हटा दिया गया तो चुनाव के दिन वे मतदान ही नहीं कर पाएंगे।
एक-एक घर में ४० से ५० नाम
शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि चुनाव आयोग भुतही चालें चल रहा है। एक-एक घर में ४० से ५० नाम दर्ज किए गए हैं। इसलिए मतदाताओं से आग्रह है कि आपके घर में ऐसे लोग तो नहीं जो दिखाई नहीं देते और आपकी अनुमति के बिना ही रह रहे हैं? ये जो चुनाव आयोग के भूत खड़े किए गए हैं, वे आपके घर में तो नहीं रह रहे? इसकी भी जांच करनी चाहिए। इसलिए जहां-जहां हमारे केंद्र स्थापित होंगे, वहां आस-पास की बस्तियों के सभी जाति, पंथ और धर्म के मतदाता आएं और उस मतदाता सूची की जांच करें।
जेन-जी से डर रही है सरकार
एक जुलाई कट-ऑफ डेट रखी गई है। एक जुलाई के बाद जो लड़के और लड़कियां १८ वर्ष के हुए हैं, उन्हें इस चुनाव में मतदान का अधिकार नहीं दिया जा रहा है। आप देख रहे हैं कि दुनियाभर में इसी उम्र के युवक-युवतियां सड़कों पर उतरकर क्रांति कर रहे हैं, जिन्हें हम जेन-जी कहते हैं। उन्होंने सवाल पूछा कि आखिरकार यह सरकार जेन-जी से क्यों डर रही है?
युवा क्यों नहीं कर सकते मतदान?
अगर लोकसभा से विधानसभा के बीच के पांच-छह महीनों में परकला प्रभाकर यानी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति ने कहा है कि लगभग ४५ लाख मतदाता महाराष्ट्र की सूची में जोड़े गए हैं। अगर चार महीनों में ४५ लाख मतदाता घुसाए जा सकते हैं तो वे कहां गए, क्या कर रहे हैं, यह सवाल है? लेकिन अगर वे जोड़े जा सकते हैं तो एक जुलाई के बाद जिन युवाओं को मतदान का अधिकार मिलना चाहिए था, वे महाराष्ट्र के युवा मतदान क्यों नहीं कर सकते? इसलिए उन सभी लड़कों और लड़कियों से भी अपील करता हूं कि वे हमारी शाखाओं में आएं और अपने नाम वहां दर्ज कराएं, ताकि हमें पता चलेगा कि कितने लाख लड़के-लड़कियां मतदान से वंचित रखे जा रहे हैं।
