सामना संवाददाता / मुंबई
एक सुनियोजित और आधुनिक शहर का दर्जा प्राप्त करने के बावजूद इन दिनों नई मुंबई में गड्ढों का साम्राज्य पैâला हुआ है। ऐरोली टोल नाका से दिवा गांव चौक तक सड़क की दुर्दशा न केवल वाहन चालकों के लिए सिरदर्द है, बल्कि नई मुंबई मनपा और महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) की लापरवाही को भी उजागर करती है।
ऐरोली खाड़ी ब्रिज से दिवा गांव चौक तक वाहन चालकों को सड़क पर पड़े गड्ढों से बचते हुए सफर करना पड़ता है। इससे दुर्घटना का न केवल खतरा बढ़ गया है, बल्कि यातायात जाम दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। गड्ढे इतने गहरे हैं कि हर दिन दोपहिया वाहन चालकों की जान खतरे में पड़ रही है। भारी बारिश के दौरान अगर चालक गड्ढों का अनुमान न लगाएं तो दोपहिया वाहनों के पहिए उनमें फिसलकर एक बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। इस बात को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी व्याप्त है कि सरकार केवल टोल वसूलती है, लेकिन सुविधाएं नहीं देती है।
मनपा और एमएसआरडीसी में टकराव
सड़क की जिम्मेदारी को लेकर मनपा और एमएसआरडीसी के बीच टकराव देखने को मिल रहा है। ऐरोली टोल नाका से खाड़ी ब्रिज तक का इलाका एमएसआरडीसी के अधिकार क्षेत्र में आता है, जबकि दिवा गांव का इलाका नई मुंबई मनपा के अधिकार क्षेत्र में आता है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक से दिवा गांव तक की सड़क मनपा के अधिकार क्षेत्र में है। हालांकि, मनपा प्रशासन सड़क की मरम्मत का दावा करता है, लेकिन वास्तविक स्थिति अलग है। मनपा ने सड़क का कंक्रीटीकरण किया है। लेकिन सड़क किनारे बने गड्ढों को पेवर ब्लॉक से भर दिया है, जिससे सड़क का संतुलन बिगड़ गया है। बारिश के मौसम में डामर डालने से गड्ढे गहरे और जानलेवा हो गए हैं। नागरिकों ने चेतावनी दी है कि सड़कों की जल्द से जल्द मरम्मत की जाए, अन्यथा वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे।
ठाणे-बेलापुर सड़क पर भी गड्ढे
गड्ढों और यातायात पुलिस की योजना के अभाव में नई मुंबईवासियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। मुलुंड-ऐरोली रोड, ठाणे-बेलापुर रोड के साथ-साथ तलवली और ऐरोली की आंतरिक सड़कों पर गड्ढों के कारण शाम के कार्यालय समय में भारी ट्रैफिक जाम लग रहा है।
नई मुंबई मनपा क्षेत्र में सड़क मरम्मत का काम मनपा प्रशासन कर रहा है। ऐरोली खाड़ी पुल से डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक बस अड्डे की सड़क एमएसआरडीसी के अंतर्गत आती है। इस संबंध में बार-बार पत्र व्यवहार किया जा रहा है।
– संजय पाटील, कार्यकारी अभियंता, ऐरोली
