मुख्यपृष्ठस्तंभअयोध्या में सबकुछ गड़बड़ है!

अयोध्या में सबकुछ गड़बड़ है!

-राम मंदिर चढ़ावे के विवाद से श्रद्धा पर चोट, दान घटने का दावा

-जांच के बीच अयोध्या पहुंचे योगी; एफआईआर न होने पर भी सवाल

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी का मामला अब केवल कुछ कर्मचारियों की भूमिका अथवा नकदी की गणना तक सीमित नहीं रह गया है। विवाद के बीच मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और दान में कमी आने के दावे किए जा रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन किए। उनके कार्यक्रम में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होने की चर्चाओं ने भी राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।
मंदिर को पिछले कई महीनों से प्रतिमाह औसतन करीब सात करोड़ रुपए का दान मिल रहा था, लेकिन पिछले एक पखवाड़े में दान का आंकड़ा करीब डेढ़ करोड़ रुपए बताया जा रहा है। हालांकि, ट्रस्ट अथवा प्रशासन की ओर से दान में आई इस कथित गिरावट के विस्तृत और तुलनात्मक आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
योगी के कार्यक्रम में प्रतिनिधि भेजने का निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे से पहले जिला प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा एवं प्रोटोकॉल कार्यक्रम भी चर्चा में है। इसमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से रामलला के दर्शन-पूजन की व्यवस्थाओं के लिए एक अधिकृत प्रतिनिधि नामित करने और उसका संपर्क विवरण ड्यूटी मजिस्ट्रेट को उपलब्ध कराने को कहा गया था। प्रशासनिक स्तर पर इसे सामान्य समन्वय व्यवस्था माना जा रहा है। फिर भी दान प्रकरण की एसआईटी जांच के बीच चंपत राय की जगह प्रतिनिधि बुलाए जाने के अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। कुछ हलकों में इसे सरकार द्वारा जांच पूरी होने तक विवाद से जुड़े पदाधिकारियों से औपचारिक दूरी बनाए रखने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, सरकार या प्रशासन ने ऐसी किसी दूरी की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
आभूषणों के रिकॉर्ड की भी जांच
जांच का दायरा नकद चढ़ावे के साथ मंदिर में दान किए गए सोने-चांदी के आभूषणों तक पहुंचने की खबरें हैं। बताया जा रहा है कि एसआईटी यह जांच रही है कि दानपात्रों से प्राप्त अंगूठियों, चूड़ियों, हार तथा दूसरी बहुमूल्य वस्तुओं को किस रजिस्टर में दर्ज किया गया और उनका सुरक्षित भंडारण किसकी जिम्मेदारी थी।
एसबीआई की भूमिका भी जांच के दायरे में लाने की मांग
नृपेंद्र मिश्र के अनुसार, दानराशि की गणना से संबंधित व्यवस्था में भारतीय स्टेट बैंक की भूमिका भी देखी जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि समझौते के अंतर्गत बैंक के माध्यम से नकदी की गणना की जानी थी तो यह जांचना आवश्यक है कि निर्धारित दिशा-निर्देशों का वास्तव में कितना पालन किया गया। उन्होंने प्रतिदिन प्राप्त दान और उसके लेखे-जोखे को सार्वजनिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराने जैसी व्यवस्था का भी समर्थन किया है। ऐसा होने पर श्रद्धालु यह जान सकेंगे कि मंदिर को कितनी नकदी, कितने आभूषण और अन्य वस्तुएं प्राप्त हुर्इं तथा उनका उपयोग किस मद में किया गया। राम मंदिर का निर्माण देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं के सहयोग और विश्वास से हुआ है। ऐसे में चढ़ावे की एक-एक पाई का हिसाब रखना केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि सार्वजनिक आस्था के प्रति उत्तरदायित्व भी है।
एसआईटी ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों से की पूछताछ
उत्तर प्रदेश सरकार ने दानराशि में कथित गड़बड़ी की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल गठित किया है। एसआईटी ने ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र सहित नकदी गणना और दान प्रबंधन से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की है। जांच का मुख्य केंद्र दानपात्रों से नकदी निकालने, उसकी गणना करने, कर्मचारियों की नियुक्ति और निगरानी व्यवस्था बताया जा रहा है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने भी स्वीकार किया है कि निगरानी व्यवस्था में गंभीर कमियां सामने आई हैं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की निष्ठा पर विश्वास रखने के साथ उनकी निगरानी भी आवश्यक है। उन्होंने मंदिर प्रबंधन में एक वरिष्ठ और सक्षम मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने की आवश्यकता बताई है।

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