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मनपा चुनाव से पहले घातियों में गुटबाजी…२४ घंटों में ही बगावत!

– दिंडोशी, विलेपार्ले, गोरेगांव और चारकोप में इस्तीफे की धमकी

-शिंदे गुट ने की थी ३६ महिला पदाधिकारियों की नियुक्ति

सामना संवाददाता / मुंबई

मनपा चुनाव से पहले घाती गुट खुद ही गुटबाजी की आग में झुलसता दिखाई दे रहा है। मुंबई में ३६ महिला पदाधिकारियों की नियुक्ति के महज २४ घंटों में ही बगावत के सुर तेज हो गए हैं। इस पैâसले ने संगठन में असंतोष और अंदरूनी कलह को हवा दे दी है। दिंडोशी, विलेपार्ले, गोरेगांव और चारकोप जैसे महत्वपूर्ण विभागों में कार्यकर्ताओं ने इस्तीफे की धमकी देकर नेतृत्व की नींद उड़ा दी है। चुनाव से ठीक पहले की इस उठा-पटक ने घाती गुट की खोखली एकजुटता को उजागर कर दिया है।
नई नियुक्तियों में उपेक्षित पदाधिकारियों का आरोप है कि मेहनत करने वालों को दरकिनार कर बाहरी चेहरों को तरजीह दी गई है। विलेपार्ले में जितेंद्र जानावले को विभाग प्रमुख पद न दिए जाने पर उन्होंने बगावत का बिगुल पंâूक दिया, वहीं गोरेगांव और दिंडोशी में गणेश शिंदे ने कार्यकर्ताओं संग सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी दी है। चारकोप में भी विधानसभा प्रमुख संजय सावंत ने इस्तीफा देने की चेतावनी देकर माहौल गरमा दिया है। महज कुछ ही घंटों में उठी इस बगावत से साफ हो गया है कि शिंदे गुट की संगठनात्मक मजबूती पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। दूसरी तरफ मनपा चुनाव से पहले भड़की इस गुटबाजी ने भाजपा की रणनीति को भी हवा दे दी है। भाजपा पहले ही राज्यभर में ‘स्वबल’ की तैयारी कर रही है और शिंदे गुट में मची कलह ने उसे और मजबूती दी है। शिंदे गुट जिस छत्रपति संभाजीनगर और मुंबई में अपना वर्चस्व बचाने की जुगत लगा रही है, वहीं अंदरूनी टूट-फूट ने उसकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
‘महायुति’ में गुटबाजी तेज
महायुति में गुटबाजी अब चरम पर है। मनपा चुनाव की रणभूमि पर ‘तू डाल-डाल, मैं पात-पात’ का खेल तेज हो चुका है। इसी कड़ी में अब मुंबई, ठाणे, कल्याण, नासिक, पुणे, छत्रपति संभाजी नगर में शिंदे गुट ने तेजी से विस्तार शुरू कर दिया है। इसके तहत उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने खुद मैदान में उतरकर पूरा सूत्र संचालन अपने हाथ में ले लिया है।
सबसे बड़ी चुनौती
कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटना और नेताओं का असंतोष खुलकर सामने आना सीधे तौर पर मतदाताओं की धारणा को प्रभावित करेगा। ऐसे में शिंदे गुट के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वे असंतुष्ट नेताओं को साधकर संगठन में एकजुटता कायम रखें और भाजपा के ‘एकला चलो’ अभियान का मुकाबला कर सकें।

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