सामना संवाददाता / भदोही
आरोपियों का ईडी, पटना के एनएचएआई बैंक फ्रॉड से भी संबंध
बैंक खातों में ₹30 लाख से अधिक की धनराशि कराई गई फ्रीज
भदोही, 16 जून। उत्तर प्रदेश की भदोही पुलिस को फर्जी ट्रेडिंग एवं इनवेस्टमेंट प्लेटफॉर्म के माध्यम से देशभर में 50 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार करने में सफलता मिली है।
संगठित गिरोह फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों को निवेश पर अधिक लाभ का झांसा देकर ठगी करता था। गिरोह के विरुद्ध देश के विभिन्न राज्यों से 100 से अधिक एनसीआरपी (NCRP – National Cyber Crime Reporting Portal) शिकायतें दर्ज हैं। इनके द्वारा 50 से अधिक म्यूल (Mule) बैंक खातों का उपयोग कर अवैध धनराशि प्राप्त और स्थानांतरित की जाती थी। साइबर पुलिस टीम द्वारा त्वरित वित्तीय कार्रवाई करते हुए गिरोह से जुड़े विभिन्न बैंक खातों में ₹30 लाख से अधिक की धनराशि फ्रीज कराई गई है।
गिरफ्तार साइबर ठगों के पास से पांच मोबाइल फोन, सात जियो सिम कार्ड, पांच एटीएम और डेबिट कार्ड बरामद किए गए हैं, जो यूबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीबीआई और फिनो बैंक से संबंधित हैं। इसके अलावा, यस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक की तीन चेकबुक भी बरामद की गई हैं। दो फर्जी आधार कार्ड, खाता खोलने के लिए दो बैंक फॉर्म, आधार संशोधन के 43 फॉर्म, एक बायोमेट्रिक थंब मशीन, दो स्टैंप पैड, ₹2,750 नकद और एक पेटीएम क्यूआर कार्ड भी बरामद किया गया है।
अपर पुलिस अधीक्षक भदोही शुभम अग्रवाल ने बताया कि मंगलवार को ज्ञानपुर कोतवाली क्षेत्र के बनकट जमीने छनौरा गांव से आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में मन्नू सिंह (39), निवासी नंदापुर, थाना ज्ञानपुर और ओमप्रकाश गौतम (35), निवासी चकसिखारी, थाना ज्ञानपुर, जनपद भदोही शामिल हैं।
गिरफ्तार साइबर अपराधियों के बैंक खातों और साइबर ठगी नेटवर्क के विरुद्ध केरल, हरियाणा, दिल्ली, तेलंगाना, बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों से कुल 50 से अधिक एनसीआरपी शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।
अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल ने मीडिया को बताया कि गिरफ्तार साइबर ठग अपने साथियों के साथ मिलकर एफआईएसडी प्रो (FISD PRO) नामक फर्जी ट्रेडिंग एवं इन्वेस्टमेंट वेबसाइट संचालित करते थे। आरोपी व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप बनाकर लोगों को कम समय में अधिक मुनाफा कमाने का लालच देते थे तथा निवेश के लिए प्रेरित करते थे।
फर्जी फर्म और म्यूल खातों का करते थे इस्तेमाल
वांछित अभियुक्त की सहायता से बैक डेट में फर्जी उद्यम पंजीकरण प्रमाणपत्र तैयार कर विभिन्न बैंकों में फर्जी फर्मों के नाम पर करंट और कॉरपोरेट खाते खुलवाए जाते थे, जिनमें ठगी की धनराशि प्राप्त की जाती थी।
पहचान छिपाने के लिए तैयार करते थे फर्जी दस्तावेज
आरोपी अन्य व्यक्तियों के आधार कार्ड पर अपनी फोटो लगाकर कूटरचित दस्तावेज तैयार करते थे तथा उन्हीं के आधार पर फर्जी सिम, व्हाट्सएप और टेलीग्राम अकाउंट संचालित करते थे।
बैंक खातों की जांच में पता चला कि खाता संख्या 138861900001519 (यस बैंक) सिद्धार्थ इंटरप्राइजेज (प्रो. ओमप्रकाश गौतम) के नाम पर संचालित पाया गया, जिस पर 28 एनसीआरपी शिकायतें दर्ज हैं। मात्र छह दिनों में इस खाते में लगभग ₹77 लाख का संदिग्ध लेन-देन हुआ।
इस संबंध में महादेवापुरा जिला, बेंगलुरु (कर्नाटक) में मुकदमे दर्ज हैं। वहीं, खाता संख्या 138861900001529 (यस बैंक) वांछित आरोपी की फर्म के नाम पर संचालित पाया गया, जिस पर सात एनसीआरपी शिकायतें दर्ज हैं तथा खाते में ₹1.03 करोड़ से अधिक का संदिग्ध लेन-देन हुआ है। इसके संबंध में आईटी एक्ट के तहत साइबर थाना, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) में अभियोग पंजीकृत है।
गिरफ्तार आरोपी मन्नू सिंह द्वारा बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी खातों का संचालन कराया जाता था तथा नेट बैंकिंग आईडी और पासवर्ड गिरोह के अन्य सदस्यों को उपलब्ध कराए जाते थे। भदोही साइबर पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरोह से जुड़े खातों में उपलब्ध ₹30 लाख से अधिक की धनराशि फ्रीज कराई गई है।
जांच के दौरान यह महत्वपूर्ण तथ्य भी प्रकाश में आया कि फरार आरोपी सुमित सिंह, जो पूर्व में कोटक महिंद्रा बैंक का ब्रांच मैनेजर रह चुका है, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), पटना द्वारा जांच किए गए चर्चित एनएचएआई बैंक फ्रॉड प्रकरण में भी आरोपी है। यह मामला ₹31 करोड़ के फ्रॉड से जुड़ा है। इस मामले में नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के खातों से फर्जी दस्तावेजों और कूटरचित बैंकिंग प्रक्रियाओं के माध्यम से लगभग ₹31 करोड़ से अधिक की धनराशि की धोखाधड़ी किए जाने का आरोप है।
जांच में सामने आया कि तत्कालीन बैंक प्रबंधक सुमित सिंह ने इस धोखाधड़ी की योजना तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। गिरफ्तार आरोपी मन्नू सिंह और उसकी पत्नी रीमा सिंह पर भी उक्त अवैध धनराशि के लेन-देन तथा उसे छिपाने और खपाने में संलिप्त होने के आरोप हैं। इस प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा भदोही स्थित मन्नू सिंह और रीमा सिंह के नाम की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया जा चुका है। तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में आभूषण और नकदी भी बरामद की गई थी तथा मन्नू सिंह सहित अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की गई थी।
अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल ने बताया कि इस मामले में भदोही साइबर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने इस प्रकरण का खुलासा करने वाली पुलिस टीम के विजय कुमार गुप्ता (प्रभारी निरीक्षक, साइबर क्राइम थाना, भदोही), निरीक्षक संतोष कुमार श्रीवास्तव, देवानंद सिंह, कन्हैया कुमार सिंह, प्रभात चंद्र त्रिपाठी और रामनारायण गौड़ को सराहनीय कार्य के लिए बधाई दी।
