काश
मंजिलें चूमती मुझको,
जो लड़खड़ाते न कदम।
काश उस्ताद की हर
बात जो मानी होती।
जवान शख्स को देखा
तो जलन होने लगी।
काश ताउम्र मेरी
ऐसी जवानी होती।
कितनी पागल है आज
नामवर पे ये दुनिया।
होती महफिल कोई,
जो मेरी दिवानी होती।
हुआ जो उम्रदराज,
तो कहने लगा ये पूरन,
कोई दिलचस्प एक
मेरी कहानी होती।
पूरन ठाकुर जबलपुरी
कल्याण पूर्व
