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अपराजिता की पहली पुस्तक “द मैन बिहाइंड माई फादर” का नैनीताल में हुआ लोकार्पण

सामना संवाददाता / नैनीताल

लेखिका अपराजिता कोटलिया की प्रथम पुस्तक “द मैन बिहाइंड माई फादर” का लोकार्पण आज 16 जून को उनके गृह नगर नैनीताल में आयोजित किया गया। यह वही शहर है, जिससे उनकी स्मृतियाँ और पुस्तक की मूल प्रेरणा गहराई से जुड़ी हुई हैं।
पुस्तक लोकार्पण समारोह का उद्घाटन कुमाऊँ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर दीवान एस. रावत द्वारा किया गया।
नैनीताल में आयोजित लोकार्पण कार्यक्रम में स्वर्गीय प्रोफेसर बहादुर कोटलिया के जीवन, व्यक्तित्व और योगदान को भी स्मरण किया गया। इस अवसर पर प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, विद्यार्थी, परिवारजन, मित्र तथा समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े तमाम लोग मौजूद रहे।
“द मैन बिहाइंड माई फादर” एक अत्यंत भावनात्मक और व्यक्तिगत कृति है, जो लेखिका के दिवंगत पिता प्रोफेसर बहादुर कोटलिया को समर्पित है। प्रोफेसर कोटलिया एक प्रतिष्ठित भू-विज्ञानी, राष्ट्रीय भू-विज्ञान पुरस्कार से सम्मानित शिक्षाविद् तथा अनेक पीढ़ियों के छात्रों के प्रेरणास्रोत और मार्गदर्शक रहे हैं।
यह पुस्तक लेखिका अपराजिता की उस आत्मिक यात्रा का परिणाम है, जिसके माध्यम से उन्होंने अपने पिता को उन लोगों की दृष्टि से पुनः जानने और समझने का प्रयास किया, जिन्होंने उन्हें निकट से जाना था।
कई महीनों तक अपराजिता ने परिवारजनों, मित्रों, सहकर्मियों, विद्यार्थियों और शुभचिंतकों से संवाद किया तथा उनसे जुड़ी स्मृतियों, प्रसंगों, तस्वीरों, पत्रों और दस्तावेज़ों को संजोया। इन अनुभवों ने उन्हें अपने पिता के व्यक्तित्व के उन अनेक आयामों से परिचित कराया, जो एक बेटी की दृष्टि से परे थे।
इस पुस्तक के माध्यम से उन्होंने न केवल एक प्रतिष्ठित विद्वान की विरासत को संरक्षित करने का प्रयास किया है, बल्कि उस संवेदनशील, स्नेही और मूल्यनिष्ठ व्यक्ति को भी जीवंत किया है, जिसने उनके जीवन को आकार दिया।
पुस्तक के बारे में अपराजिता कहती हैं, “अपने जीवन के अधिकांश समय तक मैं उन्हें केवल अपने पिता के रूप में जानती थी। इस पुस्तक को लिखते हुए मुझे उन अनगिनत जीवनों को देखने और समझने का अवसर मिला, जिन्हें उन्होंने एक शिक्षक, वैज्ञानिक, मार्गदर्शक, मित्र और परिवार के सदस्य के रूप में स्पर्श किया था। यह यात्रा मेरे लिए स्मरण, समझ और कृतज्ञता की यात्रा बन गई।”
यह पुस्तक केवल संस्मरण नहीं, बल्कि विरासत, स्मृति और पिता-पुत्री के अटूट संबंध का उत्सव है। व्यक्तिगत अनुभवों और उन लोगों की यादों के माध्यम से, जिन्होंने प्रोफेसर कोटलिया को निकट से जाना, यह पुस्तक ज्ञान, ईमानदारी और सेवा को समर्पित एक जीवन की गहरी छाप को सामने लाती है।
एक प्रथम लेखिका के रूप में अपराजिता आशा करती हैं कि यह पुस्तक उन सभी पाठकों के हृदय को छुएगी, जिन्होंने कभी किसी अपने से गहरा प्रेम किया है, किसी प्रियजन को खोने का दुःख महसूस किया है और स्मृतियों के माध्यम से उन्हें जीवित रखने की कोशिश की है। “द मैन बिहाइंड माई फादर” अंततः उन लोगों की कहानी है, जो हमारे जीवन से भले ही चले जाएँ, लेकिन अपनी स्मृतियों और मूल्यों के माध्यम से सदैव हमारे साथ बने रहते हैं।
लेखिका के बारे में
अपराजिता कोटलिया नैनीताल स्थित सेंट मेरीज़ कॉन्वेंट स्कूल की पूर्व छात्रा हैं। “द मैन बिहाइंड माई फादर” उनकी प्रथम पुस्तक है, जो परिवार, स्मृति, शोक और विरासत की एक गहन एवं व्यक्तिगत यात्रा को अभिव्यक्त करती है।
अपने दिवंगत पिता प्रोफेसर बहादुर कोटलिया को जानने वाले लोगों से हुई बातचीत और अपनी व्यक्तिगत स्मृतियों के आधार पर अपराजिता ने इस पुस्तक के माध्यम से एक सम्मानित भू-विज्ञानी, शिक्षाविद्, मार्गदर्शक और सबसे बढ़कर एक स्नेहमय पिता की कहानी को संरक्षित करने का प्रयास किया है।
इस पुस्तक के माध्यम से अपराजिता अपने पिता की स्मृतियों, मूल्यों और विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रखना चाहती हैं।
इस मौके पर मंजू कोटलिया, अपराजिता कोटलिया, दर्जा राज्य मंत्री शांति मेहरा, ऐश्वर्य बिष्ट, डॉ. मनोज बिष्ट, विनीता बिष्ट, प्रोफेसर राजीव उपाध्याय, प्रोफेसर संतोष कुमार, डॉ. दीपा आर्या, प्रोफेसर नीता बोरा व प्रीति शर्मा सहित तमाम लोग मौजूद रहे

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