सामना संवाददाता / मुंबई
रेलवे की क्यूआर कोड टिकट बुकिंग प्रणाली में मौजूद खामियों का फायदा उठाते हुए पिछले एक साल में ४ करोड़ से अधिक यात्रियों ने पश्चिम रेलवे को चूना लगाया है। वर्ष २०२४ के बाद वर्ष २०२५ में अचानक यात्रियों की संख्या में आई बड़ी गिरावट के बाद यात्रियों द्वारा की गई इस धोखाधड़ी की चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। अनुमान है कि लगभग ४ करोड़ १० लाख यात्रियों ने बिना टिकट यात्रा की। इसके चलते रेलवे का करोड़ों रुपए का राजस्व डूब गया है।
पश्चिम रेलवे प्रशासन ने हाल ही में क्यूआर कोड टिकट बुकिंग की सुविधा बंद कर दी। पिछले एक साल में कई यात्रियों ने इस सुविधा का गलत इस्तेमाल किया और रेलवे के राजस्व पर गहरा असर पड़ा। कोरोना काल समाप्त होने के बाद पश्चिम रेलवे की लोकल ट्रेन सेवाओं में यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। २०२३ में १ अप्रैल से ३१ अगस्त तक ४००.३६ मिलियन यात्रियों की संख्या दर्ज की गई थी। अगले एक साल में इसमें १० प्रतिशत की वृद्धि हुई और २०२४ में इसी अवधि (१ अप्रैल से ३१ अगस्त) के दौरान यात्रियों की संख्या ४४१.२५ मिलियन तक पहुंच गई। लेकिन क्यूआर कोड बुकिंग सुविधा शुरू होने के बाद यात्रियों की संख्या बढ़ने के बजाय घट गई।
पिछले कुछ वर्षों की औसत वृद्धि को देखते हुए २०२५ में यात्रियों की संख्या में ४ करोड़ की बढ़ोतरी होना अपेक्षित था। लेकिन हकीकत में, २०२४ की तुलना में यात्रियों की संख्या १० लाख कम हो गई। इस दौरान ४ करोड़ से अधिक यात्रियों ने क्यूआर कोड टिकट बुकिंग की खामियों का फायदा उठाकर बिना वैध टिकट यात्रा की, ऐसा अनुमान है। इसी कारण पश्चिम रेलवे को स्टेशनों पर क्यूआर कोड से टिकट बुकिंग की सुविधा बंद करनी पड़ी है, ऐसा वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
क्यूआर कोड टिकट बुकिंग प्रणाली की खामियों की फिलहाल गहन समीक्षा की जा रही है। यात्री किसी भी तरह से इस प्रणाली का दुरुपयोग न कर सकें, इसके लिए एक महीने के भीतर परीक्षण किया जाएगा और संबंधित खामियां दूर की जाएंगी, ऐसी जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी।
