मुख्यपृष्ठसमाचारचार पुल ‘खतरनाक’ फिर भी आवाजाही जारी!

चार पुल ‘खतरनाक’ फिर भी आवाजाही जारी!

-प्रशासन को हादसे का इंतजार?

-आईआईटी की रिपोर्ट का इंतजार क्यों?

सामना संवाददाता / मुंबई

दक्षिण और मध्य मुंबई में रेलवे पटरियों के ऊपर बने चार फुटओवर ब्रिजों को रेलवे प्रशासन ने असुरक्षित करार दिया है। इसके बाद मुंबई मनपा ने इन पुलों की संरचनात्मक जांच आईआईटी बॉम्बे से कराने का निर्णय लिया है। जांच के लिए करीब १२ लाख रुपए अग्रिम भुगतान की मंजूरी स्थायी समिति से मांगी जाएगी। सवाल यह है कि जब रेलवे इन पुलों को पहले ही खतरनाक बता चुका है, तब यात्रियों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने के बजाय एक और रिपोर्ट का इंतजार क्यों किया जा रहा है?
इन पुलों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में रेल यात्री और स्थानीय नागरिक गुजरते हैं। मानसून के दौरान लगातार बारिश, लोहे के हिस्सों में जंग, पुराने ढांचे पर बढ़ता दबाव और भीड़ के कारण जोखिम और बढ़ जाता है। इसके बावजूद अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जांच पूरी होने तक पुलों पर आवाजाही सीमित की जाएगी या नहीं। न तो वैकल्पिक मार्गों की विस्तृत जानकारी सामने आई है और न ही भीड़ नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की घोषणा की गई है।
आईआईटी बॉम्बे पुलों के खंभों, गर्डरों, स्लैब, सीढ़ियों, जोड़ों और भार वहन करने की क्षमता की जांच करेगा। तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि पुलों की सामान्य मरम्मत संभव है या उन्हें बंद कर पुनर्निर्मित करना पड़ेगा। विशेषज्ञ जांच जरूरी है, लेकिन जांच के दौरान किसी दुर्घटना की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मुंबई में पुराने और जर्जर पुलों को लेकर पहले भी चेतावनियां जारी होती रही हैं।
१२ पुल खतरनाक स्थिति में
पिछले वर्ष मनपा ने मध्य और पश्चिम रेलवे मार्गों पर बने १२ पुलों को खतरनाक स्थिति में बताते हुए नागरिकों को उन पर भीड़ न लगाने और सावधानी से गुजरने की सलाह दी थी। कुछ पुलों की मरम्मत मानसून के बाद शुरू करने की बात कही गई थी। रेलवे और मनपा के बीच पुलों के स्वामित्व, रखरखाव और खर्च की जिम्मेदारी को लेकर अक्सर प्रक्रियाएं लंबी खिंचती हैं। लेकिन प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र का विवाद यात्रियों की सुरक्षा से बड़ा नहीं हो सकता।
पुलों के नाम सार्वजनिक करे रेलवे व मनपा प्रशासन
रेलवे और महानगरपालिका को तुरंत चारों पुलों के नाम सार्वजनिक करने चाहिए। जांच पूरी होने तक प्रत्येक पुल पर भार और भीड़ की सीमा तय हो, चौबीस घंटे निगरानी रखी जाए तथा जरूरत पड़ने पर पुल बंद कर वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराया जाए। अन्यथा किसी हादसे के बाद जांच समिति बैठाने और जिम्मेदारी तय करने का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा।

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