मुख्यपृष्ठसमाचारप्रयागराज में उफनाई गंगा-यमुना, बांधों पर बढ़ी निगरानी

प्रयागराज में उफनाई गंगा-यमुना, बांधों पर बढ़ी निगरानी

राजेश सरकार / प्रयागराज

सावन-भादों की मूसलाधार बारिश के बाद तीर्थराज प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। जलग्रहण क्षेत्रों और स्थानीय स्तर पर हुई भारी बारिश का असर दोनों नदियों के जलस्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। पिछले 24 घंटे में यमुना और गंगा के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि जिले के सभी सुरक्षा बांध सुरक्षित हैं और सिंचाई विभाग लगातार निगरानी कर रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार, फाफामऊ में सर्वाधिक 103.8 मिलीमीटर और नैनी क्षेत्र में 56.8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसका सीधा असर नदियों के जलस्तर पर पड़ा है। यमुना नैनी में 59 सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ते हुए 79.68 मीटर पर पहुंच गई है। वहीं, गंगा का जलस्तर फाफामऊ में 36 सेंटीमीटर और छतनाग में 57 सेंटीमीटर बढ़ा है। वर्तमान जलस्तर खतरे के निशान 84.734 मीटर से करीब चार से पांच मीटर नीचे है। हालांकि, पानी बढ़ने की रफ्तार को देखते हुए जिला प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।
बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है और तटीय क्षेत्रों में लगातार मुनादी कराई जा रही है। अगस्त 2025 में इसी अवधि के दौरान भारी बारिश और बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण गंगा और यमुना का जलस्तर खतरे के निशान के करीब या उससे ऊपर पहुंच गया था, जिससे तटीय इलाकों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई थी। उसकी तुलना में इस वर्ष फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।
निचले इलाकों में आफत, एनडीआरएफ ने संभाला मोर्चा
शहर के निचले इलाकों और कछारी पट्टियों में लगातार बारिश से जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई है। करेली के गौस नगर, गड्ढा कॉलोनी समेत कई इलाकों में करीब चार फीट तक पानी भर गया है। इससे लोगों को घरों की पहली मंजिल पर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमें और स्थानीय पुलिस मौके पर तैनात हैं। एनडीआरएफ के जवानों ने मोटरबोट और नावों के जरिए जलमग्न घरों में फंसे मदरसा टोला के छात्रों सहित दर्जनों लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया।
प्रमुख बाढ़ राहत शिविर
जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा के निर्देश पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। इस बार एनी बेसेंट स्कूल के स्थान पर होली ट्रिनिटी स्कूल को बघाड़ा क्षेत्र का मुख्य राहत शिविर बनाया गया है। यहां प्रभावित लोगों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था की गई है।
कोरांव पंचायत भवन में राहत शिविर
यमुनापार के कोरांव क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित 485 लोगों को पंचायत भवन में बनाए गए राहत शिविर में स्थानांतरित किया गया है। एनडीआरएफ की टीम राहत सामग्री पहुंचा रही है। प्रशासन के अनुसार, जिले में कुल 1,263 बाढ़ आश्रय स्थल और 1,589 बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। इन केंद्रों पर चौबीस घंटे चिकित्सा सुविधा और भोजन के पैकेट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

अन्य समाचार