गजल

अभी-अभी तुमने
नजरों से गिराया हमें
कैसे कहते हो खुद को
हम हैं बड़े दिल वाले ।
रहा गुमान ये उनको
कि है दौलत सब कुछ
देखा कम थे वहां
लोग जनाजे वाले l
तौबा-तौबा थी उनकी
शख्सियत सुर्ख सफेद
हाॅ कही दाग के छीटे थे
कुछ काले काले l
काश बन जाये इंसानियत
एक मजहब जो
हाथ और साथ होगे
सब मजहबी जमाने वालेl
-पूरन ठाकुर जबलपुरी
कल्याण-पूर्व

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