" /> गजल

गजल

कर दुआ तू सदा आदमी के लिए।
प्यार सब पर लुटा तू खुशी के लिए।।
कौन अपना सगा सोचना छोड़ दे।
आंख में रख नमी तू सभी के लिए।।
चार दिन की है ये जिंदगी प्यार कर।
वक्त बचता कहां दुश्मनी के लिए।।
नेक बंदा है तू एक संदेश दे।
हाथ तेरा बढ़ा दोस्ती के लिए।।
रख तू इंसानियत का ही रिश्ता यहां।
दर खुला रख तेरा अजनबी के लिए।।
एक दिन खास ऐसा जिएं तो कभी।
एक लम्हा कोई हो सदी के लिए।।
दिल में संवेदना जब जगे तो उठे।
हाथ तेरा उठे, बंदगी के लिए।।
धर्म मजहब से ऊपर उठे अब तो हम।
कुछ करें राष्ट्र की उन्नति के लिए।।
रूप श्रृंगार यौवन तो राही लिखो।
एक कविता मगर जिंदगी के लिए।।
– अनिल कुमार ‘राही’