मुख्यपृष्ठस्तंभहमजा बुरहान के जनाजे ने फिर खोली पाकिस्तान की पोल

हमजा बुरहान के जनाजे ने फिर खोली पाकिस्तान की पोल

पाकिस्तान में आतंकियों को सरकारी पनाह मिलने का मुद्दा एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय चर्चा में आ गया है। अल-बद्र कमांडर हमजा बुरहान उर्फ अरजुमंद गुलजार डार के जनाजे में कई वॉन्टेड आतंकियों की मौजूदगी ने पाकिस्तान के उस दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें वह अपनी जमीन पर आतंकी ढांचे की मौजूदगी से लगातार इनकार करता रहा है।
हमजा बुरहान को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी थी, जिसके बाद उसे इस्लामाबाद में दफनाया गया। इस जनाजे में हिजबुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन और अल-बद्र प्रमुख बख्त जमीन खान जैसे आतंकी सरगना भी शामिल हुए। इतना ही नहीं, जनाजे के दौरान भारी सुरक्षा व्यवस्था और हथियारबंद लोगों की मौजूदगी भी दिखाई दी। इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि यदि पाकिस्तान वास्तव में आतंकवाद के खिलाफ है, तो उसकी राजधानी में ऐसे तत्व खुलेआम वैâसे जुट सकते हैं?
भारत के लिए यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हमजा बुरहान को जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों और भर्ती नेटवर्क से जुड़ा माना जाता रहा है। कुछ रिपोर्टों में उसे २०१९ के पुलवामा आतंकी हमले की साजिश से भी जोड़ा गया है, हालांकि ऐसे मामलों में आधिकारिक जांच एजेंसियों के निष्कर्ष ही निर्णायक माने जाने चाहिए।
यह जनाजा केवल एक आतंकी के दफन का मामला नहीं, बल्कि पाकिस्तान की दोहरी नीति का प्रतीक बन गया है। एक तरफ वह दुनिया के सामने आतंकवाद से लड़ने का दावा करता है, दूसरी तरफ उसकी जमीन पर प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े चेहरे सार्वजनिक रूप से दिखाई देते हैं। इस घटना ने फिर साबित किया कि आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और सख्त निगरानी की जरूरत अब भी बनी हुई है।
पाकिस्तान का यह आतंकवाद समर्थक चेहरा बार-बार नजर आया है, जहां प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के सरगना, पाकिस्तानी सेना / प्रशासन के लोग या भारी सुरक्षा व्यवस्था दिखाई दी है। प्रमुख उदाहरण ये हैं,
१. हमजा बुरहान- अल-बद्र कमांडर
हालिया मामला। उसके जनाजे में हिजबुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन और अल-बद्र प्रमुख बख्त जमीन खान जैसे वांछित आतंकी दिखाई दिए। आईएसआई से जुड़े लोगों की मौजूदगी का भी दावा।
२. मुदस्सर खादियां खास उर्फ अबू जुंदाल- लश्कर-ए-तैयबा
मई २०२५ में ऑपरेशन सिंदूर के बाद उसका जनाजा सबसे बड़ा प्रमाण बनकर सामने आया। उसके जनाजे में पाकिस्तानी सेना की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर, पाक सेना प्रमुख और पंजाब की मुख्यमंत्री की ओर से पुष्पांजलि, एक सेवारत लेफ्टिनेंट जनरल और पंजाब पुलिस के आईजी की मौजूदगी बताई गई। नमाज हाफिज अब्दुल रऊफ ने पढ़ाई, जिसे वैश्विक आतंकी है।
३. खालिद उर्फ अबू आकाशा- लश्कर-ए-तैयबा
इसी ऑपरेशन सिंदूर के बाद खालिद उर्फ अबू आकाशा का जनाजा पाकिस्तान के पैâसलाबाद में हुआ। इसमें पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारी और पैâसलाबाद के डिप्टी कमिश्नर शामिल हुए। खालिद जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी हमलों और हथियार तस्करी से जुड़ा था।
४. मोहम्मद यूसुफ अजहर- जैश-ए-मोहम्मद
मोहम्मद यूसुफ अजहर को जैश सरगना मसूद अजहर का रिश्तेदार और आईसी-८१४ कंधार विमान अपहरण मामले का वांछित। ऑपरेशन सिंदूर में मारे गए आतंकियों की सूची में उसका नाम भी सामने आया। उसके मारे जाने के बाद उसके जनाजे में भी सरकारी मौजूदगी के बारे में सवाल उठे।
५. हाफिज मोहम्मद जमील – जैश-ए-मोहम्मद
मसूद अजहर का करीबी रिश्तेदार और बहावलपुर स्थित जैश के मरकज से जुड़ा वरिष्ठ आतंकी था। ऑपरेशन सिंदूर के बाद उसके मारे जाने और पाकिस्तान में आतंकी संगठनों के नेटवर्क को मिले संरक्षण पर सवाल उठे।
६. मोहम्मद हसन खान – जैश-ए-मोहम्मद
वह जैश के पीओके ऑपरेशनल कमांडर मुफ्ती असगर खान कश्मीरी का बेटा।
७. ऑपरेशन सिंदूर के बाद सामूहिक जनाजे – मुरिदके और बहावलपुर
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान और पीओके में कई जनाजों के वीडियो सामने आए। इनमें हाफिज अब्दुल रऊफ द्वारा नमाज पढ़ाने और पाकिस्तानी सेना/प्रशासन से जुड़े लोगों की मौजूदगी पर भारत ने कड़ा सवाल उठाया।

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